8 डॉक्टर, 4 शहर और 26 लाख कैश: दिल्ली ब्लास्ट की योजना कहां और कैसे बनी? जानिए लेटेस्ट अपडेट

Published : Nov 13, 2025, 12:10 PM IST
Delhi blast medical module

सार

Delhi Blast Mystery: दिल्ली ब्लास्ट जांच में बड़ा खुलासा-8 संदिग्ध डॉक्टरों ने चार शहरों में हमलों की साजिश रची, ₹26 लाख जुटाए और फरीदाबाद में IED तैयार किए। अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी बनी मॉड्यूल की मीटिंग हब, कमरा नंबर 13 से आतंक की रूपरेखा बनी।

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली लाल किला विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। इसकी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियां बेहद चौंकाने वाले खुलासे कर रहीं हैं। जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि इस हमले के पीछे सिर्फ एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि चार शहरों में फैला एक मेडिकल मॉड्यूल आधारित आतंकी नेटवर्क था। जिसमें कम से कम आठ संदिग्धों ने चार शहरों में हमलों की योजना बनाई और "कुछ बड़ा" करने के लिए लगभग 26 लाख रुपये जुटाए।

कैसे बनी 'मेडिकल मॉड्यूल' की खतरनाक प्लानिंग?

जांच के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इन संदिग्धों ने 26 लाख रुपये नकद जुटाए थे। यह रकम कथित तौर पर ‘डॉ. उमर उन नबी’, ‘डॉ. मुज़म्मिल’, ‘डॉ. अदील’ और ‘डॉ. शाहीन’ ने इकट्ठी की थी। इस रकम से 3 लाख रुपये का NPK उर्वरक खरीदा गया, जिससे विस्फोटक IED तैयार किए जा रहे थे। ये उर्वरक गुरुग्राम और नूंह के बाजारों से खरीदे गए थे। दिल्ली पुलिस और एनआईए के अनुसार, सभी 8 संदिग्ध दो-दो के ग्रुप में 4 शहरों में बम धमाकों की साजिश रच रहे थे। प्रत्येक समूह को कई IED ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

क्या अल-फ़लाह विश्वविद्यालय बना आतंकवादियों का हब?

जांच एजेंसियों ने पाया कि अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) की बिल्डिंग नंबर 17 का कमरा नंबर 13 इन संदिग्धों की मीटिंग का केंद्र था। यह कमरा डॉ. मुज़म्मिल अहमद गाई (पुलवामा) के नाम पर था, जहां से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केमिकल और आईईडी बनाने का सामान मिला है जिनका इस्तेमाल IED की क्षमता बढ़ाने में किया जा रहा था।। एजेंसियों का दावा है कि यूनिवर्सिटी की लैब से भी कुछ रसायन चोरी करके कमरे में लाए गए थे ताकि बम की क्षमता बढ़ाई जा सके। पुलिस ने कमरा सील कर दिया है और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।

क्या था 6 दिसंबर का ‘रिवेंज प्लान’?

सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर ने कथित तौर पर अयोध्या विवादित ढांचे के विध्वंस की बरसी (6 दिसंबर) के आसपास विस्फोट की योजना बनाई थी। माना जा रहा है कि यह हमला ‘बदले की कार्रवाई’ के तौर पर किया जाना था, लेकिन डॉ. मुज़म्मिल की गिरफ्तारी के बाद यह प्लान विफल हो गया।

अमोनियम नाइट्रेट की आपूर्ति और हमले की योजना

सूत्रों के अनुसार, विस्फोटक पदार्थ अमोनियम नाइट्रेट नूह के खुले बाजार से खरीदे गए उर्वरकों से निकाले गए। सुरक्षा एजेंसियों ने नूह और मेवात में समन्वित तलाशी अभियान चलाया। जांच में पता चला कि मुज़म्मिल ने इन बाजारों की पहचान की थी और वहां से सामग्री लाई गई थी।

क्या अब विश्वविद्यालय के फंडिंग की होगी जांच?

सूत्रों ने संकेत दिया है कि अब अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी की फंडिंग और विदेशी दान की जांच शुरू होने वाली है। पुलिस ने पहले ही परिसर को सील कर कई रिकॉर्ड जब्त किए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क को विदेशों से आर्थिक सहायता तो नहीं मिल रही थी। NIA और दिल्ली पुलिस की जांच हर दिन नए खुलासे कर रही है लेकिन एक बात तय है, लाल किला ब्लास्ट केस अब सिर्फ एक विस्फोट नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन चुका है।

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Read more Articles on

Recommended Stories

मकर संक्रांति: कहीं गर्दन की हड्डी रेती तो कहीं काटी नस, चाइनीज मांझे की बेरहमी से कांप उठेगा कलेजा
Ariha Shah Case: साढ़े 4 साल से Germany में फंसी मासूम, मौसी ने बताया क्या है पूरा मामला