
Delhi Car Blast Case: हरियाणा के फरीदाबाद में पकड़े गए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के संदिग्धों ने जांच एजेंसियों को बताया है कि दिल्ली कार ब्लास्ट के आतंकी उमर उन नबी के पास हथियार बनाने के लिए एक सीक्रेट 'मोबाइल वर्कस्टेशन' था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, फरीदाबाद में पकड़े गए आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल शकील ने जांचकर्ताओं को बताया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने वाले उमर उन नबी ने अपने कैंपस के कमरे में ही उस केमिकल कंपाउंड का एक छोटा-सा टेस्ट किया था, जिसका इस्तेमाल उसने बाद में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने में किया था।
सूत्रों के मुताबिक, उमर उन नबी का 'मोबाइल वर्कस्टेशन' एक बहुत बड़ा सूटकेस है, जिसे वह हर जगह अपने साथ रखता था। इसमें बम बनाने का सामान जैसे केमिकल कंपाउंड और उन्हें स्टोर करने के लिए कंटेनर थे। गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकियों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उमर उन नबी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अपने कमरे में विस्फोटक और केमिकल रिएक्शन का टेस्ट किया था। पुलिस को उसके सूटकेस में बम बनाने का सामान मिला, जिससे यह बात साबित हुई।
उमर उन नबी ने सुसाइड बॉम्बिंग में इस्तेमाल की गई हुंडई i20 कार में आधा-अधूरा IED रखा था। सूत्रों ने बताया कि उसने बम बनाने के लिए IED में एसिटोन या नेल पॉलिश रिमूवर और पिसी चीनी मिलाई थी। सूत्रों के मुताबिक, पहले आतंकी मॉड्यूल हरियाणा में छिपाए गए विस्फोटकों को जम्मू-कश्मीर ले जाना चाहते थे, जहां के लिए उमर उन नबी ने कुछ बड़ा प्लान बना रखा था। जब वह प्लान काम नहीं आया तो सुसाइड बॉम्बर ने IED बनाने में इस्तेमाल होने वाले अमोनियम नाइट्रेट को नूह-मेवात इलाके से इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
फरीदाबाद से पकड़े गए आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल शकील ने बताया कि उमर उन नबी खुद को आतंकी मॉड्यूल का सबसे अमीर शख्स बताता था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, उमर उन नबी 9 भाषाएं जानता था और टेरर मॉड्यूल में सबसे अधिक पढ़ा-लिखा था। मुजम्मिल शकील के मुताबिक, उमर उन नबी में न्यूक्लियर साइंटिस्ट बनने की क्षमताएं थीं। बता दें कि उमर उन नबी वही डॉक्टर है, जिसने दिल्ली में लाल किला के पास खुद को कार समेत बम से उड़ा लिया था। इस ब्लास्ट में 15 लोग मारे गए थे, जबकि 32 घायल हुए थे।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, मुजम्मिल शकील ने कहा- हम उमर उन नबी का विरोध नहीं कर सके। उसकी बातें फैक्ट्स और रिसर्च बेस्ड होती थीं। वो ज्यादा बात नहीं करता था। वो अक्सर कहता था कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वो बस दीन के लिए है। बता दें कि डॉक्टर मुजम्मिल शकील को जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य कॉन्टैक्ट मौलवी इरफान अहमद ने टेरर मॉड्यूल में सबसे पहले भर्ती किया था।
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