दिल्ली सेवा बिल दोनों सदनों में पास: 131 वोट पक्ष में तो विपक्ष में 102, अब राष्ट्रपति के सिग्नेचर के बाद बन जाएगा कानून

Published : Aug 07, 2023, 10:16 PM ISTUpdated : Aug 07, 2023, 11:26 PM IST
Rajya Sabha

सार

दिल्ली ऑर्डिनेंस बिल को सोमवार को राज्यसभा में पेश किया गया। पूरे दिन चले गहमागहमी वाले बहस के बाद देर शाम को इसे राज्यसभा में भी पास कर लिया गया।

नई दिल्ली: दिल्ली ऑर्डिनेंस बिल को सोमवार को राज्यसभा में पेश किया गया। पूरे दिन चले गहमागहमी वाले बहस के बाद देर शाम को इसे राज्यसभा में भी पास कर लिया गया। दोनों सदनों में बिल के पास होने के बाद अब यह बिल राष्ट्रपति के सिग्नेचर के बाद कानून बन जाएगा। ऑटोमैटिक वोटिंग मशीन खराब होने के कारण पर्ची से वोटिंग कराई गई। पक्ष में 131 और विपक्ष में 102 वोट डाले गए। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चार चुनाव दिल्ली में हारने के बाद बीजेपी ने बैकडोर एंट्री करके सत्ता हथियाने की कोशिश की है। यह लोकतंत्र के लिए काला दिवस है।

इसके पहले बिल पर बहस के दौरान विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए केंद्रीीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बोला कि दिल्ली सर्विस बिल किसी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों या फैसले की अवहेलना नहीं करता है। इस बिल से राष्ट्रीय राजधानी में शासन और भी प्रभावी और भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा। उन्होंने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाते हुए दोहराया कि इस बिल का उद्देश्य दिल्ली सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को रोकना है। शाह का यह बयान विपक्षी सदस्यों द्वारा इस साल मई में सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को अस्वीकार करने वाले प्रस्ताव को सदन में पारित करने के लिए पेश करने के कुछ घंटों बाद आया।

शाह बोले-इस विधेयक को कांग्रेस पहली बार लेकर आई थी

बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि यह विधेयक पहली बार कांग्रेस द्वारा लाया गया था जब वह सत्ता में थी। उन्होंने कहा कि मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि विधेयक का कोई भी प्रावधान कांग्रेस शासन में जो था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। शाह ने कहा कि कांग्रेस खुद ही यह बिल पहले ला चुकी है लेकिन इस बार केवल इसलिए इस विधेयक का विरोध कर रही है क्योंकि वह आम आदमी पार्टी को खुश करने में लगी है।

सतर्कता विभाग के अधिकारियों का तबादला करके शराब घोटाले से बचने की कोशिश

गृह मंत्री शाह ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने शराब घोटाले से खुद को बचाने के लिए सतर्कता विभाग के अधिकारियों का तबादला कर दिया। यह इसलिए किया क्योंकि शराब घोटाले की फाइल्स उसके पास थीं। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ फैसले के बाद आप सरकार ने सतर्कता विभाग में तत्काल तबादलों का आदेश दिया क्योंकि यह मुख्यमंत्री आवास नवीनीकरण सहित घोटालों की जांच कर रहा था।

विपक्ष अपना गठबंधन बचाने के लिए विधेयक का कर रहा विरोध

अमित शाह ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली सेवा विधेयक पारित होने के बाद आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल विपक्षी गठबंधन इंडिया को छोड़ देंगे। विपक्षी गठबंध अपना गठबंधन बचाने के लिए विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितनी पार्टियां इंडिया में शामिल हो जाएं, नरेंद्र मोदी 2024 में फिर से पीएम बनेंगे। इस पर कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शाह को विधेयक पर बात करनी चाहिए न कि 2024 के बारे में या व्यक्तिगत हमलों का सहारा लेने से बचना चाहिए।

आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने किया बिल का विरोध

सोमवार को हुई बहस में विपक्षी दलों कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित अन्य ने इस बिल का विरोध किया। आप नेता राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कहा कि विधेयक एक राजनीतिक धोखाधड़ी और संवैधानिक पाप है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में एक निर्वाचित सरकार की शक्तियों को छीनना है। उन्होंने गैर-एनडीए दलों से भी बिल के खिलाफ सदन में आप का समर्थन करने की अपील की।

दिल्ली की निर्वाचित सरकार से अधिकार छीन जाएगा

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 के लागू होने के बाद दिल्ली की निर्वाचित सरकार की शक्तियां बिल्कुल खत्म हो जाएंगी। यह विधेयक केंद्र सरकार को अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों, नियमों और सेवा की अन्य शर्तों सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मामलों के संबंध में नियम बनाने का अधिकार देता है। इसे केंद्र द्वारा 19 मई को लाया गया था। इसके विधेयक के लाने के एक सप्ताह पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि को छोड़कर सेवाओं का नियंत्रण आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली निर्वाचित सरकार को सौंप दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उप राज्यपाल से दिल्ली सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप का अधिकार छीन गया था। लेकिन यह बिल, उप राज्यपाल को शक्तिशाली बनाने के साथ राष्ट्रीय राजधानी की चुनी हुई सरकार को शक्ति विहीन कर देगा।

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