बलात्कारी की मां रो पड़ी, कहा मेरी तकलीफ का भी ध्यान रखें, निर्भया केस में कोर्ट में क्या हुआ

Published : Jan 07, 2020, 04:02 PM ISTUpdated : Jan 07, 2020, 04:05 PM IST
बलात्कारी की मां रो पड़ी, कहा मेरी तकलीफ का भी ध्यान रखें, निर्भया केस में कोर्ट में क्या हुआ

सार

निर्भया का दोषियों पर पटियाला हाउस कोर्ट डेथ वारंट पर फैसला सुनाएगी। पटियाला हाउस कोर्ट के जज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चारों दोषियों से बात करेंगे। सुनवाई के दौरान निर्भया की मां और दोषी मुकेश की मां कोर्ट में ही रो पड़ीं। 

नई दिल्ली. निर्भया का दोषियों पर पटियाला हाउस कोर्ट डेथ वारंट पर फैसला सुनाएगी। पटियाला हाउस कोर्ट के जज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चारों दोषियों से बात करेंगे। सुनवाई के दौरान निर्भया की मां और दोषी मुकेश की मां कोर्ट में ही रो पड़ीं। निर्भया के दोषियों के नाम अक्षय, मुकेश, विनय और पवन हैं। चारों को पहले ही फांसी की सजा दी जा चुकी है, अब सिर्फ डेथ वारंट जारी होने पर फैसला है। 3 दोषियों पवन, विनय और अक्षय की तरफ से वकील ए पी सिंह और दोषी मुकेश की तरफ से वकील एम एल शर्मा हैं।

दोषी मुकेश की मां भी रो पड़ी

सुनवाई के दौरान निर्भया की मां और दोषी मुकेश की मां दोनों मौजूद थीं। सुनवाई के दौरान दोनों ने रो दिया। दोषी मुकेश की मां ने कहा, वह भी एक मां हैं, मेरी चिंताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद जज ने दोनों से चुप रहने की अपील की।

जब आपस में हुई वकीलों की तीखी बहस

सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के वकीलों में तीखी बहस हुई। एक वकील ने दूसरे पर मामले को लटकाने का आरोप लगाया। तब जज ने बचाव किया। उन्होंने कहा, कोर्ट की व्यवस्था का ख्याल रखें। इस तरह माहौल का ना बिगाड़ें। क्या अब इस देरी को लेकर भी जांच की जाए?

समय चाहिए तो पहले डेथ वारंट जारी कर दें

सरकारी वकील ने कहा, इन्हें अब तक याचिका दायर कर देनी चाहिए थी। अगर बचाव पक्ष को समय चाहिए तो कोर्ट डेथ वारंट जारी कर 14 दिन का टाइम दे दे। अगर बचाव पक्ष को समय चाहिए तो वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से समय सीमा बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

16 दिसंबर 2012 की रात क्या हुआ था

16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया गैंगरेप पर पूरे देश ने गुस्सा जाहिर किया। दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। 

29 दिसंबर को हुई थी मौत

दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदंरजग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

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