
Delhi Riots Acquittal: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से संबंधित एक मामले में 11 आरोपियों को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) पुलस्त्य प्रमाचला ने 14 मई को दिए गए फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध करने में असफल रहा कि आरोपी संदेह से परे दोषी थे।
अदालत ने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं और वे संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं। इस आधार पर अंकित चौधरी उर्फ फौजी, सुमित उर्फ बादशाह, पप्पू, विजय, आशीष कुमार, सौरभ कौशिक, भूपेंद्र, शक्ति सिंह, सचिन कुमार उर्फ रैंचो, राहुल और योगेश को बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने मामले में दो पुलिस अधिकारियों की गवाही को खारिज कर दिया जिन्होंने वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की थी। कोर्ट ने कहा कि यदि ये आरोपी पहले से पुलिस को ज्ञात थे तो उनकी पहचान इतनी देर से क्यों की गई।
न्यायाधीश ने यह भी नोट किया कि पहचान तब दर्ज की गई जब आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी थी। ऐसे में पहचान की प्रामाणिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह मामला गोकुलपुरी थाना क्षेत्र में दर्ज FIR से जुड़ा था, जो 3 मार्च 2020 को मोहम्मद इमरान शेख की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इमरान ने आरोप लगाया कि उसकी 'क्राउन मेडिकोस' नामक मेडिकल शॉप को लूटा गया और उसमें आग लगा दी गई।
उसने बताया कि दुकान की ऊपरी मंजिलें दवाइयों से भरी थीं। घटना की सूचना उसे एक पड़ोसी असलम ने फोन पर दी थी जिसके बाद उसने पुलिस को 100 नंबर पर कॉल कर सूचना दी।
एक अन्य शिकायत अकरम अली की ओर से भी दर्ज की गई, जिसने अपने भाई असलम अली के साथ मिलकर उसी इलाके में एक सैलून चलाया था। उसने आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2020 को कुछ अराजक तत्वों ने उनकी दुकान में तोड़फोड़ की, जिससे उन्हें जान बचाकर दिल्ली छोड़नी पड़ी।
पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़े के तहत अपराध), 380 (चोरी), 427 (संपत्ति को नुकसान), और 436 (आगजनी) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।
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