
नई दिल्ली। फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के मामले में शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि आम आदमी पार्टी का पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन भी दंगा में शामिल था।
कोर्ट ने उमर खालिद के वकील और अभियोजन पक्ष को प्रभावी निर्णय के लिए प्रासंगिक सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को होगी। वहीं, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने इसी मामले में शरजील इमाम की जमानत याचिका पर सुनवाई 24 मई तक के लिए स्थगित कर दी।
दंगों में 53 लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि खालिद, इमाम और कई अन्य पर फरवरी 2020 के दंगों के "मास्टरमाइंड" होने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे। नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (National Register of Citizens) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की थी।
निचली अदालत ने खालिद और इमाम की जमानत याचिकाओं को क्रमश: 24 मार्च और 11 अप्रैल को खारिज कर दिया था। खालिद और इमाम के अलावा, खालिद सैफी, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, सफूरा जरगर, आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और कई अन्य लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है।
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ताहिर हुसैन ने भी किया दंगा
ताहिर हुसैन पर अदालत ने टिप्पणी की कि ताहिर हुसैन दंगों में सक्रिय रूप से शामिल था। उसने लोगों को अपने भाषण से भड़काया था, जिसके बाद दंगाई काफी हिंसक हो गए थे और पथराव शुरू कर दिया था। कुछ दंगाई ताहिर के घर की छत पर थे और पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे थे। आरोपी ताहिर सिर्फ साजिशकर्ता नहीं था, वह सक्रिय दंगाई भी था। उसने चुपचाप दंगों का तमाशा नहीं देखा, बल्कि उसने सक्रिय रूप से दंगे किए।
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