
नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पाइसजेट के 90 पायलटों को बोइंग 737 मैक्स एयरक्राफ्ट उड़ाने से रोका है। उसने कहा है कि इन पायलटों को उचित प्रशिक्षण की जरूरत है। ट्रेनिंग के बाद ये पायलट विमान उड़ा सकेंगे। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने सिम्युलेटर ट्रेनिंग में विसंगतियों का पता लगने के बाद यह कदम उठाया। डीजीसीए के डीजी अरुण कुमार के बताया कि इस कथित चूक के बाद एयरलाइन का पायलट प्रशिक्षण भी नियामक की जांच के दायरे में है।
11 मैक्स 737 चला रही स्पाइसजेट
स्पाइसजेट के बेड़े में वर्तमान में 13 बोइंग मैक्स 737 विमान हैं। इनमें से 11 का संचालन कंपनी कर रही है। कंपनी का कहना है कि 11 विमानों (MAX) के संचालन के लिए लगभग 144 पायलटों की जरूरत है। स्पाइसजेट के पास फिलहाल मैक्स के लिए 560 ट्रेन पायलट हैं। यानी 90 पायलटों पर रोक लगने से उसके संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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कई दुर्घटनाओं के बाद बोइंग 737 पर लगी थी रोक
बोइंग 737 विमान कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। लायन एयर और इथियोपियन एयरलाइंस B737 MAX क्रमशः अक्टूबर 2018 में लायन एयर और मार्च 2019 में इथियोपियन एयरलाइंस के विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। इन हादसों में 346 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बोइंग को तमाम देशों ने प्रतिबंधित कर दिया था। भारत में 13 मार्च 2019 से इसकी सेवाएं बंद थीं। एक साल पहले इसके सॉफ्टवेयर में बदलाव के बाद भारत समेत कई देशों ने इसे फिर से उड़ान भरने की मंजूरी दी। पिछले साल नवंबर में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर से दिल्ली के बीच स्पाइसजेट के इसी विमान से सफर किया था। चीन ने छह महीने पहले ही इसे मंजूरी दी थी, लेकिन 21 मार्च 2022 को चीन में 132 यात्रियों को ले जा रहा बोइंग 737 विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें सभी यात्रियों की मौत हो गई थी।
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