
Trump vs Harvard University: अमेरिका के राष्ट्रपति और उनकी सरकार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। एक बार फिर यूनिवर्सिटी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। अब हार्वर्ड को विदेशी छात्रों को दाखिला देने से रोक दिया गया है। अमेरिका की होमलैंड सिक्योरिटी की सचिव ने यूनिवर्सिटी को पत्र लिखकर कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह रोक जारी रहेगी।
सरकार का आरोप है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी यहूदी विरोधी सोच को बढ़ावा दे रही है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर काम कर रही है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि विदेशी छात्रों को दाखिला देना हार्वर्ड का अधिकार नहीं बल्कि एक विशेष सुविधा है।
सरकार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को 72 घंटे का समय दिया है। सरकार का कहना है कि अगर हार्वर्ड फिर से विदेशी छात्रों को दाखिला देना चाहती है, तो उसे तय समय में जरूरी जानकारी देनी होगी। तभी उसे दोबारा वो सर्टिफिकेट मिलेगा जिससे वह विदेश से आए छात्रों को पढ़ा सकेंगे। ये सर्टिफिकेट अगले सेशन से पहले लेना जरूरी होगा वरना यूनिवर्सिटी विदेशी छात्रों को एडमिशन नहीं दे पाएगी।
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13 मई को अमेरिकी सरकार ने हार्वर्ड को मिलने वाली आर्थिक मदद में कटौती की घोषणा की थी। यह फैसला उस दिन लिया गया जब एक दिन पहले ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट ने कहा था कि कुछ मामलों में ट्रंप सरकार और यूनिवर्सिटी की सोच मिलती-जुलती है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के मुताबिक हर साल 500 से 800 भारतीय छात्र और रिसर्चर वहां पढ़ाई करने जाते हैं। फिलहाल, वहां 788 भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं। हार्वर्ड की स्थापना 1636 में हुई थी और इसे दुनिया के सबसे पुराने और नामी विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। यहां से अब तक आठ अमेरिकी राष्ट्रपति पढ़ चुके हैं। इसके अलावा 200 से
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