
Father of fiber optics: फाइबर ऑप्टिक्स के चलते आज पूरी दुनिया हाई स्पीड इंटरनेट का आनंद ले रही है। क्या आप जानते हैं कि इसकी खोज किसने की थी। वह महान वैज्ञानिक थे डॉ. नरिंदर सिंह कपानी। नरिंदर का जन्म भारत के पंजाब में हुआ था। वह अमेरिका चले गए थे और बड़े भौतिक विज्ञानी के रूप में दुनिया में नाम कमाया। उन्होंने आधी सदी से भी अधिक समय पहले फाइबर ऑप्टिक्स का आविष्कार किया था। इसने आज की दुनिया में सूचना के प्रसारण और संचार के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।
डॉ. नरिंदर सिंह ने 4 दिसंबर 2020 को 94 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा था। उन्हें 2021 में मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
नरिंदर सिंह कपानी को 1999 में फॉर्च्यून पत्रिका ने नोबेल पुरस्कार-योग्य आविष्कार के लिए 20वीं सदी के सात गुमनाम नायकों में से एक के रूप में सम्मानित किया था। 1940 के दशक के अंत में कपानी ने पारंपरिक विज्ञान को चुनौती दी थी और इस अवधारणा पर सवाल उठाया था कि प्रकाश केवल सीधी रेखाओं में ही यात्रा करता है।
1953 में उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स का आविष्कार किया। उन्होंने इंसान के बाल से थोड़े मोटे व्यास वाले फाइबर बंडलों के माध्यम से हाई क्वालिटी वाली तस्वीरें भेजी। यह एक क्रांतिकारी बदलाव था। उन्होंने भविष्य के उन इनोवेटर्स के लिए रास्ता खोला जिन्होंने उनके आविष्कार का उपयोग दुनिया को बदलने के लिए किया। कपानी ने दुनिया भर में असंख्य लोगों के जीवन पर अमिट छाप छोड़ी।
कपानी का जन्म 1927 में पंजाब के मोगा में एक सिख परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन पंजाब में बिताया। देहरादून में पढ़ाई की और लंदन के इंपीरियल कॉलेज जाने से पहले आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक किया। 1953 में कपानी ने हेरोल्ड हॉपकिंस के साथ मिलकर ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से अच्छी तस्वीरें भेजने की तकनीक विकसित की और ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ शब्द गढ़ा।
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