
EAM Jaishankar on PoK: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को एक बार फिर भारत का रुख साफ करते हुए कहा कि कश्मीर पर कोई बहस नहीं है, केवल एक ही मुद्दा बचा है-पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को खाली कराना।
होंडुरास दूतावास के उद्घाटन अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा: कश्मीर मुद्दे को लेकर कभी-कभी चर्चा होती है। हम साफ कर दें कि कश्मीर पर अब केवल एक ही बात बाकी है-पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जे में रखे गए भारतीय क्षेत्र को खाली कराना। हम पाकिस्तान से सिर्फ इसी विषय पर बातचीत को तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-पाक वार्ता हमेशा द्विपक्षीय ही रहेगी और किसी भी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी।
जयशंकर ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान से किसी तरह की बातचीत होनी है तो वह केवल आतंकवाद पर होगी। पाकिस्तान के पास आतंकियों की सूची है। उसे वह सौंपनी होगी और आतंकवादी ढांचे को समाप्त करना होगा। भारत इस विषय पर बात करने को तैयार है, लेकिन विषय केवल आतंकवाद होगा।
विदेश मंत्री ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को भी तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को स्थायी रूप से नहीं रोकता, तब तक संधि अस्थायी रूप से स्थगित (abeyance) रहेगी। उन्होंने कहा कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी और सरकार दोनों ने यह निर्णय लिया है कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह नहीं छोड़ता।
22 अप्रैल को पाहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoK में मौजूद 9 आतंकी लॉन्चपैड्स पर हमले किए थे। इस कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर अंजाम दिया गया था। जयशंकर ने बताया कि इस हमले के बाद कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भारत के साथ एकजुटता दिखाई और उन्हें समर्थन के लिए फोन किया।
जयशंकर ने होंडुरास की सरकार को धन्यवाद दिया, जिन्होंने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की थी। जयशंकर ने कहा कि यह हमारे लिए संतोषजनक था कि उन्होंने हमारे साथ खड़े होकर हमले की कड़ी आलोचना की।
13 मई को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने भी यही रुख दोहराया कि सिंधु जल संधि पर रोक आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि संधि की मूल भावना सद्भाव और मित्रता की थी लेकिन पाकिस्तान की लगातार आतंकवाद नीति ने इसे कमजोर किया। जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या परिवर्तन और तकनीकी विकास ने भी नई स्थितियां पैदा की हैं, जिन पर भारत को दोबारा विचार करना जरूरी हो गया है।
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