किसान और सरकार के बीच बेनतीजा रही बातचीत, राहुल गांधी का तंज- तारीख पर तारीख देना इनकी रणनीति

Published : Jan 08, 2021, 08:05 AM ISTUpdated : Jan 08, 2021, 09:43 PM IST
किसान और सरकार के बीच बेनतीजा रही बातचीत, राहुल गांधी का तंज- तारीख पर तारीख देना इनकी रणनीति

सार

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों 43 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर डटे हैं। इसी बीच किसान और सरकार के बीच शुक्रवार को 9वें दौर की बैठक हुई। बैठक 3 घंटे चली। बैठक शुरू होते ही किसान नेताओं ने कानूनों को रद्द करने की मांग दोहराई। वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ये कानून पूरे देश के लिए हैं और उनको पंजाब-हरियाणा के अलावा पूरे देश के बारे में सोचना चाहिए। अब अगली बैठक 15 जनवरी को होगी।

नई दिल्ली. कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों 43 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर डटे हैं। इसी बीच किसान और सरकार के बीच शुक्रवार को 9वें दौर की बैठक हुई। बैठक 3 घंटे चली। बैठक शुरू होते ही किसान नेताओं ने कानूनों को रद्द करने की मांग दोहराई। किसान नेताओं ने कहा, अगर सरकार कानून वापस लेती है, तो हम भी आंदोलन खत्म कर घर लौट जाएंगे। वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ये कानून पूरे देश के लिए हैं और उनको पंजाब-हरियाणा के अलावा पूरे देश के बारे में सोचना चाहिए। अब अगली बैठक 15 जनवरी को होगी।

बैठक के बाद सरकार ने क्या कहा ?
- बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, आज किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि कानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला। सरकार की तरफ से कहा गया कि कानूनों को वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प दिया जाए, लेकिन कोई विकल्प नहीं मिला। 

- उन्होंने कहा, सरकार ने बार-बार कहा है कि किसान यूनियन अगर कानून वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प देंगी तो हम बात करने को तैयार हैं। आंदोलन कर रहे लोगों का मानना है कि इन कानूनों को वापिस लिया जाए। लेकिन देश में बहुत से लोग इन कानूनों के पक्ष में हैं। 

- किसान नेताओं और सरकार दोनों ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का फैसला लिया है। मुझे आशा है कि 15 जनवरी को कोई समाधान निकलेगा।

राहुल गांधी ने कसा तंज
उधर, बातचीत बेनतीजा रहने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तंज कसा। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, 
 


बैठक के बाद किसानों ने क्या कहा ? 
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, तारीख पर तारीख चल रही है। बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज में बिल रद्द करने की मांग की। हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी। 

या तो मरेंगे या जीतेंगे- किसान नेता
मीटिंग में एक किसान नेता ने हाथ से लिखा बोर्ड दिखाया। इसमें लिखा था या तो मरेंगे या जीतेंगे।

बातचीत से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को पंजाब में स्थित नानकसर सिख संप्रदाय के प्रमुखों में से एक धार्मिक नेता बाबा लाखा सिंह से मुलाकात की। बाबा लाखा सिंह विरोध स्थलों पर लंगर का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे सरकार और किसानों के बीच मध्यस्थता करना चाहते हैं। लेकिन किसानों ने कहा इससे इनकार कर दिया।

 

41 किसान संगठन सरकार से करेंगे बात
शुक्रवार की बात नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश और 41 कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच होगी। सूत्रों के मुताबिक, वार्ता से पहले मंत्री, अमित शाह से मिल सकते हैं।

7वें दौर की बातचीत में किसने क्या कहा?

  • कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, चर्चा का माहौल अच्छा था परन्तु किसान नेताओं के कृषि क़ानूनों की वापसी पर अड़े रहने के कारण कोई रास्ता नहीं बन पाया। 8 तारीख को अगली बैठक होगी। किसानों का भरोसा सरकार पर है इसलिए अगली बैठक तय हुई है।
  • किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, हमने बताया कि पहले कृषि कानूनों को वापिस किया जाए। MSP पर बात बाद में करेंगे। 8 तारीख तक का समय सरकार ने मांगा है। उन्होंने कहा कि 8 तारीख को हम सोचकर आएंगे कि ये कानून वापिस हम कैसे कर सकते हैं, इसकी प्रक्रिया क्या हो। हमने बता दिया है कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं होगी।
  • एमएसपी पर कानून बनाने की मांग पर सरकार ने कहा कि एक संयुक्त कमेटी बना देते हैं वो तय करे कि इन तीनों कानूनों में क्या-क्या संशोधन किए जाने चाहिए। लेकिन किसान संगठनों ने इसे खारिज कर दिया।

 

30 दिसंबर की मीटिंग में 2 मुद्दों पर बनी थी सहमति

  • पराली जलाने पर केस दर्ज नहीं होंगे। अभी 1 करोड़ रुपए जुर्माना और 5 साल की कैद का प्रावधान है। सरकार ने इसे हटाने पर हामी भर दी है।
  • बिजली अधिनियम में बदलाव नहीं किया जाएगा। किसानों का आशंका है कि इस कानून से बिजली सब्सिडी बंद हो जाएगी। अब यह कानून नहीं बनेगा। 

 

वो 2 मुद्दे, जिसपर बात बनना बाकी है

  • किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं
  • किसानों की मांग है कि एमएसपी पर अलग से कानून बने। ताकि उन्हें सही दाम मिल सके।   

 

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