
नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने बिहार में 65 साल से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए आने वाले उप-चुनावों में पोस्टल बैलट सुविधा का विस्तार नहीं करने का निर्णय लिया है। लेकिन 80 साल से ऊपर के विक्लांग, आवश्यक सेवाओं में कार्यरत और होम/इंस्टीट्युशनल क्वारंटाइन कोरोना पॉजिटिव रोगी पोस्टल बैलट से वोट कर सकते हैं। हालांकि, इससे पहले ही चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी के चलते ही वोटिंग में बदलाव किए थे कि 65 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों को पोस्टल बैलट से वोटिग करने की इजाजत दी गई थी। यह बदलाव तब किए गए, जब साल के अंत तक बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं।
राज्य ने बनवाए 34 हजार एक्स्ट्रा पोलिंग स्टेशन
चुनाव आयोग के इस फैसले को देखते हुए राज्य ने 34 हजार एक्स्ट्रा पोलिंग स्टेशन बनवाए हैं। इसके बाद विधानसभा चुनाव के दौरान पोलिंग स्टेशनों की संख्या करीब 1.6 लाख हो जाएगी। इसके बाद राज्य के सामने 1.8 लाख एक्स्ट्रा चुनाव कर्मचारियों को ले जाने और अधिक गाड़ियों की जरूरत जैसी दूसरी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह की चुनौतियां आने वाले उपचुनाव में भी होंगी। वहीं हर पोलिंग स्टेशन पर मतदाताओं की संख्या एक हजार तय की गई है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने फैसला लिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव और उप चुनाव में 65 साल से ऊपर के लोगों को पोस्टल बैलट की सुविधा नहीं दी जाएगी।
हालांकि, 80 साल से ऊपर, पीडब्यूडी वोटर्स और जरूरी सेवाओं में लगे लोगों को वैकल्पिक पोस्टल बैलट की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा कोविड संक्रमितों और क्वारंटाइन किए गए संदिग्धों को भी यह सुविधा दी जाएगी।
केंद्र ने चुनाव आयोग से की थी चर्चा
कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया था कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग के साथ मौजूदा हालात को लेकर चर्चा करने के बाद वोटिंग नियमों में बदलाव का फैसला लिया। इसके मुताबिक, सरकार द्वारा नोटिफाई अस्पताल द्वारा अगर कोई कोरोना पॉजिटिव है। कोई ऐसा मरीज जो होम या इंस्टिट्यूशनल क्वारंटाइन में है, उसे पोस्टल बैलट से वोट डालने की मंजूरी दी गई थी।
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