
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में एक फेज में चुनाव होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में 12 नवंबर को वोटिंग होगी। 8 दिसंबर को मतगणना होगी और इसी दिन नतीजे आएंगे। राजीव कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। नामांकन तक नए वोटर के नाम वोटर लिस्ट से जुड़ सकते हैं। 80 साल से अधिक उम्र के मतदाताओं को घर पर रहकर वोट देने की सुविधा दी जाएगी। चुनाव आयोग द्वारा इसके लिए व्यवस्था की जाएगी। कोरोना के मरीजों को भी घर से वोट डालने की सुविधा मिलेगी।
कुछ पोलिंग बूथ महिालाओं द्वारा संचालित होंगे। चुनाव कोविड प्रोटोकॉल के तहत होगा। हिमाचल प्रदेश में 80 साल से अधिक उम्र के वोटर की संख्या 1.2 लाख है। 1.8 लाख वोटर पहली बार मतदान करेंगे। चुनाव के दौरान सारी सीमाएं सील होंगी। शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक बैंक के कैश वैन भी नहीं चलेंगे। 55 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग से बूथ बनाने का फैसला लिया गया है। दिव्यांगों को मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर मिलेगी और उनके मतदान के लिए अलग व्यवस्था होगी। चुनाव में पैसे या ड्रग्स के इस्तेमाल या अन्य अनियमितताओं की शिकायत लोग C-vigil ऐप पर दे सकते हैं। 60 मिनट में शिकायत पर सुनवाई होगी।
हिमाचल प्रदेश चुनाव का कार्यक्रम
55,07,261 मतदाता लेंगे चुनाव में हिस्सा
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य के 55,07,261 मतदाता हिस्सा लेंगे। इनमें से 27,80,208 पुरुष और 27,27,016 महिला मतदाता हैं। 80 साल से अधिक उम्र के 122087 मतदाता अपना वोट डालेंगे। वहीं, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या 186681 है। 1184 वोटर ऐसे हैं जिनकी उम्र 100 साल से अधिक है।
8 जनवरी 2023 को समाप्त हो रहा है कार्यकाल
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 8 जनवरी 2023 को समाप्त हो रहा है। यहां 2017 में पिछला विधानसभा चुनाव हुआ था। हिमाचल प्रदेश में 68 सीटों के लिए चुनाव होगा। इस समय यहां भाजपा की सरकार है। दुबारा सरकार बनाने के लिए भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लगातार दौरे कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017
ये है हिमाचल प्रदेश विधानसभा का गणित
हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकार है। इसका कार्यकाल 8 जनवरी 2023 को खत्म हो रहा है। यहां कुल 68 सीटें हैं। अगर पिछले विधानसभा की बात करें, तो तब एक फेज में 9 नवंबर को वोटिंग हुई थी। तब भाजपा ने 44 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं। 2 सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर सीपीआइ (मार्क्सवादी) जीती थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में 75.28 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। यहां 2021 में 3 सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा को एक पर भी जीत नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इसके पीछे महंगाई बड़ी वजह बताते हैं। हालांकि मोदी यहां लगातार दौरे करके माहौल बनाने में लगे हैं।
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