
Elon Musk on EVM hacking: ईवीएम की हैकिंग की आशंका जताते हुए इसके इस्तेमाल को खत्म किए जाने की बात कहकर टेक दिग्गज एलन मस्क ने एक नई बहस छेड़ दी है। एलन मस्क के दावों पर भारत में सबसे अधिक प्रतिक्रिया हो रही है। भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने मस्क के दावे को सिरे से नकारते हुए यह कहा कि भारतीय ईवीएम मशीनों को किसी भी सूरत में हैक नहीं किया जा सकता है। 2004 में पहली बार ईवीएम मशीन व्यापक स्तर पर प्रयोग में लाया गया। ईवीएम क्या है और कैसे काम करता है?, इसे जानने के पहले जानते हैं एलन मस्क ने क्या कहा?
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एलन मस्क ने कहा: हमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए। इंसानों या एआई द्वारा हैक किए जाने का जोखिम है। हालांकि, यह जोखिम छोटा है, फिर भी बहुत अधिक है।
पहले समझिए ईवीएम यूनिट को?
अब जानते हैं कि ईवीएम कैसे काम करता है। दरअसल, ईवीएम यानी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन एक स्वतंत्र ईकाई है। यह तीन यूनिट्स का जोड़ होता है। एक बैलेट यूनिट, दूसरा वीवीपैट और तीसरा कंट्रोल यूनिट।
बैलेट यूनिट
बैलेट यूनिट, की-बोर्ड की तरह होता है। इसमें 16 कीस या बटन होते हैं। इन बटनों में किसी एक को दबाकर वोटर्स अपना वोट देता है। हर बटन, एक अलग पार्टी या कैंडिडेट का होता है। बटन पर सीरियल नंबर, कैंडिडेट का नाम, सिंबल चस्पा होता है ताकि वोटर पहचान कर वोट कर सके।
कंट्रोल यूनिट
कंट्रोल यूनिट होता है जोकि पोलिंग ऑफिसर या प्रेसाइडिंग अफसर के पास होता है। इसे मास्टर यूनिट भी कहते हैं। बैलेट यूनिट के बटन को दबाने के पहले पोलिंग अफसर को मास्टर यूनिट को ऑन करना होता है। मास्टर यूनिट में सारा डेटा एकत्र होता है। मास्टर यूनिट में किस बटन को कितनी बार दबाया गया, इसका डेटा रखता है। वोटर द्वारा बटन दबाए जाने के बाद एक लंबा बीप साउंड होता है।
वीवीपीएटी
वोटर के बटन दबाने के बाद बीप साउंड आता है। एक एलईडी बटन जलता है। कंट्रोल यूनिट इसके बाद वीवीपीएटी को कमांड भेजता है। इसके बाद वीवीपीएटी एक पर्ची प्रिंट करता है। पर्ची पर सीरियल नंबर, कैंडिडेट का नाम और सिंबल छपता है। यह पर्ची, सात सेकेंड के लिए दिखता है, जिसे वोटर देख सकता है।
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