
नई दिल्ली. मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार दिल्ली सरकार के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन(health minister satyendra jain) की मुसीबतें बढ़ती ही चली जा रही हैं। 17 जून को प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने फिर उनके और करीबियों के करीब आधा दर्जन ठिकानों पर छापा मारा है। इससे पहले 6 जून को भी ED ने उनके ठिकानों पर तलाशी ली थी। जैन पर कोलकाता की एक कंपनी से हवाला(मनी लॉन्ड्रिंग) के जरिये लेनदेन का आरोप है। (File Photo)
18 जून को होगी जमानत पर सुनवाई
सत्येंद्र जैन इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद हैं। उनकी जमानत पर अब 18 जून को राउज एवेन्यू कोर्ट कोई फैसला देगी। जैन को 13 जून को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत(judicial custody) में भेजा गया था। 30 मई को अरेस्ट जैन इससे पहले 13 जून तक प्रवर्तन निदेशालय(ED)की कस्टडी में थे। वे 13 जून तक प्रवर्तन निदेशालय(ED)की कस्टडी में थे। अब उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत(judicial custody) में भेज दिया गया है। उन्हें 30 मई को अरेस्ट किया गया था।
इससे पहले रेड में मिले थे 2 करोड़ नगद और 1.8 किलो सोना
सत्येंद्र जैन(health minister satyendra jain) के घर की 6 जून को भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापा मारा था। रेड के दौरान ₹2 करोड़ से अधिक नकद और 1.8 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था। ED की जांच में सामने आया है कि सत्येंद्र जैन 2015-16 में कोलकाता की एक फर्म के साथ हवाला के जरिये लेनदेन किया था। जैन को 4.81 करोड़ की संपत्तियों को ED द्वारा कुर्क किए जाने के करीब 2 महीने बाद अरेस्ट किया गया। जांच एजेंसी ने CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। जैन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली में कई मुखौटा कंपनियां बनाईं या खरीदीं और उनके माध्यम से 16.39 करोड़ रुपये के काले धन को व्हाइट किया।
यहां CBI की रेड: खाद घोटाले में गहलोत के भाई के घर की तलाशी
सीबीआई ने शुक्रवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के जोधपुर स्थित आवास और कई अन्य स्थानों पर किसानों के लिए खाद के निर्यात से संबंधित कथित भ्रष्टाचार और उस पर सब्सिडी का दावा करने के संबंध में तलाशी ली। यहां अधिकारियों ने कहा। 2007-09 में कथित खाद घोटाले(fertiliser scam) से संबंधित तलाशी अभियान में गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में 16 अन्य स्थानों को भी कवर किया गया, जिसमें मामले के अन्य आरोपियों के परिसरों को कवर किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने इंडिया पोटाश लिमिटेड के अधिकृत डीलर गहलोत और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के बाद अभियान शुरू किया। आरोप है कि 2007-09 के बीच किसानों के लिए बने म्यूरेट ऑफ पोटाश का निर्यात दक्षिण पूर्व एशियाई देशों, सऊदी अरब और अन्य बाजारों में 'औद्योगिक नमक' के रूप में किया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि उर्वरक पर सरकारी सब्सिडी भी कथित तौर पर संबंधित कंपनियों के बीच फर्जी लेनदेन के माध्यम से आरोपी ने अपने पास रख ली थी।
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