
नई दिल्ली। 2020 में गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव जारी है। भारतीय सेना LAC (Line of Actual Control) के आसपास लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। इसी क्रम में इंडियन आर्मी ने LAC के करीब पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के दो रेजिमेंट तैनात कर रही है। इसके लिए प्रोसेस शुरू हो गया है। पिनाका भारत का अपना रॉकेट सिस्टम है। इससे चीन से लगी सीमा पर भारत के तोपखाने की मारक क्षमता बढ़ेगी। अगर ड्रैगन (चीन) ने आंख दिखाने की कोशिश की तो भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब देगी।
पूर्वी लद्दाख में LAC पर चीन के साथ सैन्य गतिरोध चल रहा है। इस बीच सरकार ने इंडियन आर्मी के लिए पिनाका रॉकेट के छह रेजिमेंट स्वीकृत किए हैं। इस 214 मिमी मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम को उत्तरी सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिनाका के दो नए रेजिमेंट के लिए सैनिकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। अगले छह महीने में दोनों रेजिमेंट को सीमा के पास तैनात कर दिया जाएगा। वर्तमान में पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा और चीन के साथ उत्तरी सीमा पर भारतीय सेना ने पिनाका के चार रेजिमेंट तैनात किए हैं। आर्टिलरी (सेना में तोप चलाने वाला विभाग) में एक यूनिट को रेजिमेंट कहा जाता है।
DAC ने पिनाका के छह रेजिमेंट को दी थी मंजूरी
2018 में DAC (Defence Acquisition Council) ने छह अतिरिक्त पिनाका रेजिमेंट के लिए मंजूरी दी थी। DAC रक्षा मंत्रालय की फैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। 2020 में रक्षा मंत्रालय ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML), टाटा पावर कंपनी लिमिटेड और L&T (Larsen & Toubro) के साथ पिनाका के छह रेजिमेंट सप्लाई करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इसपर करीब 2580 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
सभी छह रेजिमेंट 2024 तक स्थापित किए जाने थे। हालांकि सूत्रों ने बताया है कि सिर्फ दो रेजिमेंट स्थापित करने के लिए प्रोसेस चल रहा है। यह अगले कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा। पिनाका के छह रेजिमेंट के लिए AGAPS (Automated Gun Aiming & Positioning System) के साथ 114 लॉन्चर और 45 कमांड पोस्ट TPCL व L&T से और BEML से 330 वाहन लिए जाने थे। पिनाका रॉकेट सिस्टम को भारत सरकार की संस्था DRDO ने विकसित किया है। इसका उत्पादन टाटा समूह और L&T द्वारा मिलकर किया जाता है।
पिनाका रॉकेट सिस्टम की खास बातें
पिनाका रॉकेट सिस्टम के एक रेजिमेंट में तीन बैटरी होते हैं। एक बैटरी में पिनाका के छह लॉन्चर होते हैं। हर एक लॉन्चर में 12 रॉकेट लगते हैं। इसका रेंज 40 किलोमीटर है। एक लॉन्चर के सभी 12 रॉकेट को सिर्फ 44 सेकंड में फायर किया जा सकता है। भारतीय सेना पहले से रूस से खरीदे गए ग्रैड बीएम-21 रॉकेट का इस्तेमाल कर रही है। ये पुराने हो गए हैं। भारतीय सेना को इन्हें फेज आउट करने के लिए पिनाका के 22 रेजिमेंट की जरूरत है। आने वाले समय में लंबी दूरी के रॉकेट तोपखाने में स्वदेशी रूप से विकसित पिनाका इंडियन आर्मी का मुख्य हथियार होगा। इसका इस्तेमाल एक बड़े इलाके पर भारी बमबारी के लिए होता है। पिनाका अपने टारगेट पर सटीक वार करता है। इससे दुश्मन के सैन्य मुख्यालय, एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह किया जा सकता है।
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पिनाका रॉकेट को निर्यात कर रहा भारत
भारत पिनाका रॉकेट को निर्यात भी कर रहा है। आर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष के बीच, आर्मेनिया ने पिनाका की चार बैटरी के लिए ऑर्डर दिया है। इसकी लागत दो हजार करोड़ रुपए है। वहीं, इंडोनेशिया और नाइजीरिया समेत कई देश इस रॉकेट को खरीदने पर विचार कर रहे हैं।
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