आखिर क्या है सेंगोल? जिसकी पूरे देश में हो रही चर्चा, जानें पीएम मोदी द्वारा संसद भवन में स्थापित की जाने वाली इस पवित्र चीज का इतिहास

Published : May 24, 2023, 04:28 PM ISTUpdated : May 28, 2023, 06:33 AM IST
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सार

28 मई को पीएम मोदी द्वारा नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किया जाएगा। इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सेंगोल की स्थापना के लिए संसद भवन से बेहतरीन जगह और कोई नहीं।

ट्रेंडिंग डेस्क. सोशल मीडिया पर 'सेंगोल' (Sengol) चर्चा का विषय बना हुआ है। 28 मई को भारत के नए संसद भवन के उद्घाटन अवसर पर इसे स्थापित किया जाएगा। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर सेंगोल है क्या? तो आइए इस आर्टिकल में जानें कि सेंगोल किसे कहते हैं, सेंगोल का इतिहास क्या है और क्यों इसे इतना महत्व दिया जा रहा है।

नए संसद भवन में स्थापित होगा सेंगोल

सेंगोल का इतिहास बताने से पहले आपको बता दें कि बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नए सांसद भवन में ऐतिहासिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए यहां सेंगोल स्थापित किया जाएगा। दरअसल, सेंगोल को स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रतीक माना जाता है। सेंगोल को राजदंड भी कहा जाता है।

क्या है सेंगोल का इतिहास?

दरअसल, सेंगोल की प्रथा को आजादी से जोड़कर देखा जाता है। यह अंग्रेजों से भारतीयों को सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक था। सेंगोल तमिल भाषा के शब्द 'सेम्मई' से बना हुआ शब्द है। इसका अर्थ होता है धर्म, निष्ठा और सच्चाई। सेंगोल राजदंड प्राचीनकाल में भारतीय राजाओं की शक्ति और अधिकार का प्रतीक माना जाता था। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी नए संसद भवन के उद्घाटन से पहले तमिलनाडु से सेंगोल प्राप्त करेंगे और वह इसे नए संसद भवन के अंदर रखेंगे। 28 मई को सेंगोल स्पीकर की सीट के पास स्थापित किया जाएगा।

जवाहरलाल नेहरु ने स्वीकारा था सेंगोल

इतिहासकार बताते हैं कि 14 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने तमिलनाडु की जनता से सेंगोल को स्वीकार किया था। यह भारत पर अंग्रेजों की सत्ता खत्म होने और लोगों को सत्ता सौंपने का संकेत था। इसे इलाहाबाद के एक संग्रहालय में भी रखा गया था। सेंगोल जिसे दिया जाता है उससे निष्पक्ष शासन करने की उम्मीद की जाती है। भारत की स्वतंत्रता के वक्त इस पवित्र सेंगोल को प्राप्त करने की घटना को दुनियाभर के अखबारों ने कवर किया था।

तमिल चोल साम्राज्य से जुड़ा है सेंगोल

इतिहासकार आगे बताते हैं कि चोल काल के दौरान राजाओं के राज्याभिषेक समारोहों में सेंगोल का खास महत्व था। भाले की तरह दिखने वाले सेंगोल पर शानदार नक्काशी और सजावट होती थी थी। इसके साथ ही सेंगोल को अधिकार व शक्ति का एक प्रतीक माना जाता था, जो एक सत्ता परिवर्तन या हस्तांतरण के दौरान एक शासक दूसरे शासक को देता था।

संसद में क्यों स्थापित होगा सेंगोल?

28 मई को पीएम मोदी द्वारा नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किया जाना है। इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सेंगोल की स्थापना के लिए संसद भवन से बेहतरीन जगह और कोई नहीं। यह सेंगोल के लिए सबसे उपयुक्त, पवित्र और उचित स्थान है। गृहमंत्री ने आगे कहा, 'जब संसद भवन देश को समर्पित किया जाएगा उसी दिन पीएम मोदी तमिलनाडु से आए सेंगोल को स्वीकार करेंगे और फिर उसे यहां स्थापित किया जाएगा।'

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