किले में बदला दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर, टिकैत पर लगे सरकार को ब्लैकमेल करने के आरोप, मुकदमे हटाने सारा ड्रामा

Published : Jan 31, 2021, 08:45 AM ISTUpdated : Jan 31, 2021, 08:49 AM IST
किले में बदला दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर, टिकैत पर लगे सरकार को ब्लैकमेल करने के आरोप, मुकदमे हटाने सारा ड्रामा

सार

दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा के बाद देशद्रोह के आरोपों में घिरे टिकैत पर अब सरकार को ब्लैकमेल करने का आरोप लगा है। भारतीय किसान यूनियन(भानु) के लीडर भानु प्रताप सिंह ने राकेश टिकैत पर आरोप लगाया है कि वे अपने ऊपर से सभी मुकदमे हटवाने के लिए धरने पर बैठे हैं। इस बीच दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर को पुलिस ने किलेबंदी में तब्दील कर दिया है। धरनास्थल को रातों-रात 12 लेयर बैरिकेडिंग से घेर दिया गया है।


नई दिल्ली. 26 जनवरी को दिल्ली हिंसा के बाद बिखर चुके किसान आंदोलन में अपने आंसूओं से जान फूंकने वाले किसान नेता राकेश टिकैत पर सरकार को ब्लैकमेल करने का आरोप लगा है। ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद खुद को आंदोलन से पीछे हटाने वाले भारतीय किसान यूनियन(भानु) के लीडर भानु प्रताप सिंह ने कहा है कि टिकैत किसानों के हक के लिए नहीं, बल्कि अपने ऊपर दर्ज मुकदमे हटवाने धरने पर बैठे हैं। बता दें कि टिकैत दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं। उन पर दिल्ली में हिंसा फैलाने का केस दर्ज है। जब पुलिस उन्हें पकड़ने पहुंची, तब उन्होंने रो-रोकर सहानुभूति बंटोर ली थी। भानु ने कहा कि जैसे ही मुकदमे हटा लिए जाएंगे, राकेश टिकैत अपने गांव चले जाएंगे। इस बीच रातों-रात गाजीपुर बॉर्डर को किलेबंदी में तब्दील कर दिया गया। यहां 12 लेयर बैरिकेडिंग कर दी गई हैं।

आंदोलन में पड़ चुकी है फूट
दिल्ली हिंसा के बाद किसान आंदोलन में फूट पड़ चुकी है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ 2 महीने से चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन(भानु) ने बुधवार को धरना खत्म कर दिया था। इसके बाद चिल्ला बॉर्डर के जरिये दिल्ली-नोएडा मार्ग 57 दिनों बाद यातायात के लिए खुल गया था।

मोदी कह चुके हैं सरकार अपने वादे पर कायम

इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी किसानों को बातचीत के लिए आमंत्रित कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसानों से बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। सरकार ने जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। हालांकि राकेश टिकैत कानून रद्द कराने पर अड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह बताए कि वो कानून वापस क्यों नहीं लेना चाहती? उसकी ऐसी क्या मजबूरी है? अगर सरकार बता दे, तो वे धरना खत्म कर देंगे।

अकाली दल ने दिया धार्मिक रंग
उधर, दिल्ली हिंसा के बाद शिरोमणि अकाली दल ने सिंघु बॉर्डर पर हुई हिंसक झड़प को धार्मिक मुद्दा बना लिया है। अकाली दल ने कहा है कि सिंघु बॉर्डर पर हुई हिंसक झड़प की जांच कराई जाए। पार्टी दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएगा।

दिल्ली पुलिस ने मैग्जीन द कारवां के खिलाफ भ्रामक और झूठी खबरें फैलाने के लिए केस दर्ज किया है। मैग्जीन ने ट्वीट किया था कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में हिंसक किसान रैली के बाद आईटीओ चौराहे पर पुलिस गोलीबारी में एक किसान की गोली लगने से मौत हो गई। हालांकि किसान की मौत एक्सीडेंट में हुई थी।

 

 

 

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