
हासन (कर्नाटका): ग्राम पंचायत के कामों के कागजात हासिल करने के लिए एक किसान ने अपनी दूध देने वाली गाय ही बेच दी। यह घटना हासन जिले में हुई है। जब सूचना का अधिकार कानून (RTI) के तहत दस्तावेज पाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी, तो किसान ने अपनी पाली-पोसी गाय को बेच दिया।
यह मामला हासन जिले के अरकलगुडु तालुक के बसवनहल्ली कोप्पलु गांव के किसान बीएस रवि से जुड़ा है। रवि को शक था कि उनकी कालेनाहल्ली ग्राम पंचायत में 15वें वित्त आयोग योजना के कामों में घोटाला हुआ है। इस घोटाले के कागजात पाने के लिए उन्होंने RTI के तहत अर्जी दी थी। PDO (पंचायत विकास अधिकारी) ने उन्हें यह कहकर डराने की कोशिश की कि दस्तावेज कुल 16,000 पन्नों के हैं। लेकिन किसान डरा नहीं। उसने कहा, "जो होगा देखा जाएगा, मैं पैसे देने को तैयार हूं।" कानून के नियम के मुताबिक, किसान को हर पेज के लिए ₹2 के हिसाब से कुल ₹32,000 चुकाने पड़े।
जब इतनी बड़ी रकम चुकाना मुश्किल हो गया, तो किसान रवि को कोई और रास्ता नहीं सूझा। उन्होंने अपनी दूध देने वाली एक गाय को ₹32,000 में बेचकर पैसों का इंतजाम किया। यह रकम चुकाकर उन्होंने ग्राम पंचायत से 16,000 पन्नों के दस्तावेज हासिल कर लिए।
हजारों पन्नों के दस्तावेजों का भारी बंडल लेने के बाद, किसान रवि उसे ले जाने के लिए बैलगाड़ी का सहारा लिया, जो काफी अनोखी बात थी। उन्होंने दस्तावेजों की प्रतियों को बैलगाड़ी से अपने गांव तक पहुंचाया। किसान रवि के इस कदम से ग्राम पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी हैरान रह गए।
कहा जा रहा है कि जब रवि कागजात लेने गए, तो कुछ लोगों ने उन्हें रोकने के लिए पुलिस में झूठी शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन, वह धमकियों से नहीं डरे और आखिरकार अपनी गाय बेचकर मिले पैसों से दस्तावेज हासिल कर लिए। अब वह पंचायत के घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए तैयार हैं।
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