
नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की 66 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में शनिवार को कैंसर की बीमारी के चलते निधन हो गया। जेटली काफी लंबे समय से बीमार थे। एम्स की तरफ से शुक्रवार 9 अगस्त, 2019 की रात 9 बजे जेटली की मेडिकल रिपोर्ट जारी गई थी। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, जेटली आईसीयू में कई डॉक्टरों की निगरानी में थे। हालांकि, कई दिनों से उनकी हालात स्थिर बताई जा रही थी। क्या आप जानते 23 साल की उम्र में उन्हें घर छोड़कर रात बजे भागना पड़ा था।
ये थी वजह
साल 1975 और इंदिरा गांधी की सरकार तो सभी को आज भी याद है। ये वो साल जब इंदिरा ने प्रधानमंत्री रहते हुए देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। अरुण जेटली 25 जून, 1975 को रात के दो बजे घर से भागे थे। उस वक्त देश में आपातकाल लगा दिया गया था। सरकार विरोधी नेताओं की गिरफ्तारियां हो रही थीं। अरुण जेटली उन दिनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्य थे।
एबीवीपी तत्कालीन कांग्रेस सरकार की विरोधी थी। उस रात जेटली के घर का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया गया। फिर उनके पिता महाराज कृष्ण जेटली किसी से बहस करने लगे। तेज आवाजों से 23 वर्षीय अरुण जेटली की नींद खुली। उन्होंने देखा कि उनके पिता दरवाजे पर खड़े होकर पुलिसवालों से बहस कर रहे थे। जेटली को समझते देर नहीं लगी कि पुलिस उन्हें पकड़ने आई है। वे गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले दरवाजे से भाग गए।
जाना पड़ गया था जेल
रात दो बजे घर से भागने के बावजूद भी अरुण जेटली को जेल जाना भी पड़ गया था। इंदिरा सरकार में उन्हें कई दिन जेल में गुजारने पड़े थे। हालांकि वहां से लौटने के बाद वे थोड़े बदल भी गए और उन्होंने इसके बाद जनसंघ को ज्वॉइन कर लिया था।
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