तमिलनाडु के मंदिरों को राज्य के नियंत्रण से मिले मुक्ति...सद्गुरु ने सीएम पलनीस्वामी और स्टालिन को लिखा पत्र

Published : Mar 07, 2021, 05:45 PM IST
तमिलनाडु के मंदिरों को राज्य के नियंत्रण से मिले मुक्ति...सद्गुरु ने सीएम पलनीस्वामी और स्टालिन को लिखा पत्र

सार

तमिलनाडु में मंदिरों को राज्य सरकार से मुक्ति दिलाने के अभियान को तेज करते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. पलनीस्वामी और विपक्ष के नेता एमके स्टालिन को पक्ष लिखा है। उन्होंने मांग कि है कि मंदिरों को आजाद करने संबंधी योजनाओं को चुनावी घोषणापत्रों में भी शामिल किया जाए। 

चेन्नई. तमिलनाडु में मंदिरों को राज्य सरकार से मुक्ति दिलाने के अभियान को तेज करते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. पलनीस्वामी और विपक्ष के नेता एमके स्टालिन को पक्ष लिखा है। उन्होंने मांग कि है कि मंदिरों को आजाद करने संबंधी योजनाओं को चुनावी घोषणापत्रों में भी शामिल किया जाए। 

इतना ही सद्गुरु ने इस अपील को 'मंदिर को सरकारी नियंत्रण से आजाद कराने के लिए तमिल लोगों को पुकार' कहा है। इस पत्र में उन्होंने राजनेताओं से अपील की है कि वे तमिल लोगों की सहनशीलता को समझें और उन्हें राज्य के लोगों के लिए यह कदम उठाना चाहिए। 
 
ईशा फाउंडेशन ने सौंपा पत्र
ईशा फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने सद्गुरु की ओर से मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता को पत्र सौंपा। सद्गुरु ने पत्र में लिखा कि तमिल मंदिरों की पवित्रता और जीवंतता ही तमिल संस्कृति की आत्मा है। लेकिन राज्य के नियंत्रण में मंदिरों के होने से यह लगातार घट रही है। 

तमिलनाडु में मंदिरों की हो रही दुर्दशा 
सद्गुरु के मुताबिक, हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (मानव संसाधन और सीई) विभाग ने हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट में यह माना है कि 11,999 मंदिरों के पास एक दैनिक पूजा करने तक के लिए भी पैसे नहीं हैं। वहीं,  34,093 मंदिर, सालाना आय 10,000 रु से कम होने की वजह संघर्ष कर रहे हैं। 

इतना ही नहीं सरकार के नियंत्रण वाले 44,121 मंदिरों में से 37,000 से अधिक मंदिरों के पास एक से अधिक लोगों को नियुक्त करने के लिए पर्याप्त आय नहीं है, और एक ही व्यक्ति को मंदिर में पूजा से लेकर मंदिर के रख-रखाव के सारे काम करने पड़ते हैं।

घोषणापत्र में मांग को करें शामिल
सद्गुरु ने ट्वीट कर बताया,  मैंने तमिलनाडू के सीएम और विपक्ष के नेता से अपील की है कि वे मंदिरों को राज्य के नियंत्रण से मुक्त करने के बारे में अपने इरादे को घोषित करें। हम दशकों की उपेक्षा और उदासीनता को जारी नहीं रख सकते। यह समुदाय के लिए आध्यात्मिक आत्महत्या के बराबर है। 

सोशल मीडिया पर लोगों का मिला साथ
 सोशल मीडिया पर #FreeTNTemples अभियान को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिल रहा है। सद्गुरु, तमिलनाडू में मंदिरों की दुर्दशा के बारे में चौंकाने वाले तथ्य हर दिन जारी करते रहे हैं। विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और उन्हें बढ़ावा देने पर ध्यान देने वाली संयुक्त राष्ट्र संस्था, यूनेस्को ने भी साल 2017 के एक अध्ययन में तमिलनाडु के मंदिरों की स्थिति पर टिप्पणी की थी। यूनेस्को के निष्कर्षों में तमिलनाडु में 'नियमों का घोर उल्लंघन' और 'ऐतिहासिक मंदिरों के विध्वंस और विनाश के कुछ वाकई चौंकाने वाले दृश्य' नाम के अध्ययन शामिल थे।

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