
नई दिल्ली। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने की दिशा में केद्र सरकार ने अहम पहल किया है। सरकार ने तय कर दिया है कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन स्टैंडर्ड क्या होगा। इसे सरकार द्वारा अधिसूचित कर दिया गया है। यह नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की बड़ी प्रगति है।
न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री द्वारा मानक जारी किया गया है। इसमें उत्सर्जन की उस सीमा को बताया गया है जिससे तय होगा कि रिन्यूएबल सोर्स से पैदा किया जाने वाला हाइड्रोजन ग्रीन है या नहीं। परिभाषा के दायरे में इलेक्ट्रोलिसिस-आधारित और बायोमास-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन विधियां शामिल हैं।
एक किलो ग्रीन हाइड्रोजन के लिए दो किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए CO2 का उत्सर्जन
मंत्रालय ने तय किया है कि तैयार किए गए हाइड्रोजन को ग्रीन तभी माना जाएगा जब एक किलो हाइड्रोजन के उत्पादन में दो किलो से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) या इसके जैसे ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन नहीं हो। चाहे इसके लिए जल उपचार, इलेक्ट्रोलिसिस, गैस शुद्धिकरण, सुखाने और हाइड्रोजन के दबाने सहित कोई भी तरीका अपनाया जाए।
नोडल प्राधिकरण होगा ऊर्जा दक्षता ब्यूरो
अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, ऊर्जा मंत्रालय ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन परियोजनाओं की निगरानी, सत्यापन और प्रमाणन के लिए एजेंसियों की मान्यता के लिए नोडल प्राधिकरण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन मानक तय होने से भारत में ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर स्पष्टता आई है। इसका काफी इंतजार किया जा रहा था। इस अधिसूचना के साथ भारत ग्रीन हाइड्रोजन की परिभाषा की घोषणा करने वाले दुनिया के पहले कुछ देशों में से एक बन गया है।
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