
तिरवंतपुरम. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा मंगलवार को विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया गया था। जिसे मंजूरी मिल गई थी। इन सब के बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने आज यानी गुरुवार को कहा कि यह प्रस्ताव संवैधानिक नहीं है। जिसका कोई मतलब नहीं है।
यह कहा राज्यपाल ने
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने गुरुवार को कहा कि केरल विधानसभा द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव न तो वैध है और न ही संवैधानिक। उन्होंने कहा कि नागरिकता का अधिकार केंद्र सरकार का विषय है इसलिए इस प्रस्ताव को कोई अर्थ नहीं है।
विधानसभा को परंपरा जीवित रखने की जरूरत
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मंगलवार को प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि केरल में धर्मनिरपेक्षता का एक लंबा इतिहास रहा है। शुरुआत में ईसाई और मुसलमान केरल पहुंचे। हमारी परंपरा समावेशिता की है। हमारी विधानसभा को परंपरा को जीवित रखने की जरूरत है। जिसके बाद विधानसभा ने नागरिकता संशोधन कानून को हटाने की मांग संबंधी प्रस्ताव पास कर दिया ।
क्या है सीएए?
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से हिंदू, सिख, पारसी, बुद्ध, जैन और ईसाई समुदायों को नागरिकता देने का प्रावधान है जबकि मुसलमानों को इससे बाहर रखा गया है। जिसका जम कर विरोध किया जा रहा है। इसके विरोध में देश के कई राज्यों में हिंसात्मक घटनाएं भी घटित हुई।
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