
नई दिल्ली. देश में नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर कई जगहों पर विरोध हो रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, असम और बंगाल से हिंसक विरोध की खबरें भी आ रही हैं। इसी बीच केरल के राज्यपाल और राजीव गांधी की सरकार में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद ने नागरिकता कानून का समर्थन किया।
आरिफ मोहम्मद ने कहा, मोदी सरकार ने उस वादे को पूरा किया है, जो महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस ने पाकिस्तान में बुरी स्थिति में रह रहे लोगों से किया था। इस एक्ट की नींव 1985 और 2003 में ही रखी जा चुकी है। सरकार ने बस इसे कानूनी रूप दिया है।
उन्होंने कहा, पाकिस्तान को मुस्लिम देश के तौर पर बनाया गया था, तो क्या वहां मुस्लिमों को धर्म के आधार पर सताया जाएगा? हमने पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिमों को नागरिकता दी है, लेकिन इसलिए नहीं क्यों कि उन्होंने सताया गया, बल्कि आर्थिक अवसरों की तलाश के लिए यहां आए।
राजीव सरकार से दे दिया था इस्तीफा
खान ने 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, राजीव सरकार ने शाहबानो मामले में कानून लाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया था। आरिफ ने इसके विरोध में ये कदम उठाया था। आरिफ ने वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद भी किया है
क्या है नागरिकता कानून?
नागरिकता कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है।
देश के कई राज्यों में हो रहा हिंसक विरोध
नागरिकता कानून का देश के कई इलाकों में विरोध हो रहा है। असम, बंगाल और दिल्ली में कुछ इलाकों में हिंसक प्रदर्शन भी हुई। दिल्ली के जामिया में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के झड़प के मामले भी सामने आए हैं।
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