
गांधीनगर (गुजरात) [भारत], 9 जुलाई (एएनआई): गुजरात सरकार ने किसानों के डेटा की सुरक्षा के लिए कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग में एक विभागीय डेटा समिति (डीडीसी) का गठन करके डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करने की दिशा में एक और कदम उठाया है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, भारत सरकार के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (डीपीडीपी एक्ट) के प्रावधानों के अनुरूप, राज्य सरकार ने किसानों के व्यक्तिगत, वित्तीय और कृषि-संबंधी डेटा की सुरक्षा के लिए उपाय किए हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो कि इसका उपयोग केवल उनकी सहमति से और निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाए।
विभागीय डेटा समिति (डीडीसी) कृषि विभाग, उससे जुड़े बोर्डों, निगमों और कृषि विश्वविद्यालयों में डेटा के वैज्ञानिक, सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन की निगरानी करेगी। डिजिटल युग में, किसानों का डेटा उनकी जमीन और फसलों जितना ही मूल्यवान है। इस डेटा की सुरक्षा से यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और धोखाधड़ी व दुरुपयोग की गुंजाइश कम हो।
इस समिति का नेतृत्व कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव करेंगे। इसके सदस्यों में विभागीय डेटा अधिकारी, सदस्य सचिव, मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ), उप निदेशक (आईटी), आईसीटी अधिकारी, कानूनी अधिकारी, आईटी विशेषज्ञ, और विभाग के तहत सभी बोर्डों, निगमों, कृषि विश्वविद्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों के प्रमुख शामिल होंगे।
कृषि विभाग अपने सभी डेटासेट को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत करेगा: ओपन, शेयरेबल, रेस्ट्रिक्टेड, सेंसिटिव और नेगेटिव लिस्ट। इससे किसानों के साथ मौसम की जानकारी, खेती की तकनीक और बाजार की कीमतों जैसी उपयोगी जानकारी साझा करने में मदद मिलेगी, जबकि उनकी व्यक्तिगत, बैंकिंग और अन्य गोपनीय जानकारी 'सेंसिटिव' श्रेणी के तहत पूरी तरह से सुरक्षित रखी जाएगी।
समिति यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों का डेटा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (डीपीडीपी एक्ट) और अन्य लागू सरकारी नियमों के अनुसार प्रबंधित हो। इससे किसानों की व्यक्तिगत जानकारी को अनधिकृत उपयोग से बचाया जा सकेगा और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी संरक्षण सुनिश्चित होगा।
नया ढांचा 'सहमति प्रबंधन' को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। किसानों के डेटा का उपयोग केवल उनकी सहमति से किया जाएगा, और हर सहमति का एक सुरक्षित, ऑडिटेबल और ट्रेसेबल रिकॉर्ड रखा जाएगा। सहमति से जुड़े प्रावधानों के किसी भी उल्लंघन की सूचना तुरंत राज्य डेटा प्राधिकरण (एसडीए) को दी जाएगी।
समिति किसी भी सुरक्षा घटना या डेटा उल्लंघन के लिए किसानों के डेटा की लगातार निगरानी करेगी। ऐसी किसी भी घटना की सूचना तत्काल राज्य के मुख्य डेटा अधिकारी और अन्य सक्षम अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए दी जाएगी, जिससे किसानों के डेटा की मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सुरक्षित और प्रमाणित डेटा तक पहुंच कृषि क्षेत्र में बेहतर अनुसंधान और सूचित निर्णय लेने में सहायता करेगी। इससे किसान कल्याण योजनाएं अधिक प्रभावी, लक्षित और किसानों की वास्तविक जरूरतों के प्रति उत्तरदायी बनेंगी।
नई प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों की व्यक्तिगत, बैंकिंग और अन्य संवेदनशील जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित रहे। मजबूत डेटा गवर्नेंस डेटा के दुरुपयोग, अनधिकृत पहुंच और साइबर खतरों को रोकने में मदद करेगा।
कृषि नीतियां और कल्याणकारी योजनाएं प्रामाणिक डेटा और वैज्ञानिक विश्लेषण का उपयोग करके विकसित की जाएंगी। कृषि सब्सिडी, फसल बीमा, आपदा राहत और अन्य सरकारी सहायता का वितरण अधिक पारदर्शी, कुशल और सटीक हो जाएगा। परिणामस्वरूप, सरकारी लाभ सभी पात्र किसानों तक तुरंत पहुंचेंगे। (एएनआई)
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