संजय राउत पर एफआईआर : दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, चार हफ्ते में याचिकाकर्ता का बयान दर्ज करे दिल्ली पुलिस

Published : Apr 06, 2022, 06:20 PM IST
संजय राउत पर एफआईआर : दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, चार हफ्ते में याचिकाकर्ता का बयान दर्ज करे दिल्ली पुलिस

सार

भाजपा नेता संजय राउत पर 2021 में एक इंटरव्यू के दौरान महिलाओं को लेकर कथित तौर पर अपशब्द कहने के आरोप हैं। इस मामले में भाजपा नेता दीप्ति भटनागर ने एफआईआर दर्ज कराई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से 4 हफ्ते में शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने को कहा है। 

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने बुधवार को दिल्ली पुलिस (Delhi police) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति भारद्वाज का बयान दर्ज करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया। दीप्ति की शिकायत पर ही शिवसेना सांसद संजय राउत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एक मराठी समाचार चैनल को दिए गए इंटरव्यू में अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए दीप्ति ने राउत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसे रद्द कराने के लिए राउत ने याचिका दायर की है। 

पुलिस ने कहा- याचिकाकर्ता खुद नहीं बयान दर्ज करवा रहीं
जस्टिस तलवंत सिंह ने याचिकाकर्ता और राज्य के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद जांच अधिकारी (IO) को दीप्ति रावत का बयान रिकॉर्ड करने और उसकी जांच करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया। याचिका पर अगली सुनवाई 27 मई को होगी। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा है कि शिकायतकर्ता अपने बयान दर्ज कराने नहीं आईं।  

चुनाव प्रचार में व्यस्त होने का हवाला
अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने मौजूदा सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। लेकिन, वह शिकायतकर्ता का बयान दर्ज नहीं कर रही है। दिल्ली पुलिस की वकील नंदिता राव ने कहा कि शिकायतकर्ता अपना बयान देने के लिए नहीं आ रही हैंञ नोटिस के बावजूद वह जांच में शामिल नहीं हुई हैं। जब भी जांच अधिकारी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि वह चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।  

9 सितंबर 2021 को आया था राउत का इंटरव्यू
मामला 9 सितंबर, 2021 का है। उस दिन राउत ने एक लाइव टीवी इंटरव्यू में भाग लिया था। इसमें वर्तमान सरकार के प्रदर्शन पर चर्चा हो रही थी। संजय राउत का इंटरव्यू ट्विटर पर वायरल एक तस्वीर के बारे में था। इसमें राउत ने एनसीपी चीफ शरद पवार को कुर्सी की पेशकश की थी। इस दौरान राउत से पूछा गया कि क्या उनकी निष्ठा अब स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे से शरद पवार की ओर बढ़ रही है। इस पर राउत ने कहा कि बड़ों का सम्मान करना महाराष्ट्र की संस्कृति है और अगर दिवंगत वाजपेयी या लालकृष्ण आडवाणी होते तो भी उन्हें कुर्सी की पेशकश की जाती। आरोप है कि जब न्यूज एंकर ने इस विषय पर कुछ और प्रश्न पूछे, तो राउत ने कुछ अपशब्दों के साथ जवाब दिया।

महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपशब्द कहने का आरोप
इसी इंटरव्यू के अपशब्दों पर दीप्ति भारद्वाज ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत ने महिला राजनीतिक कार्यकर्ताओं का शील भंग किया है। इसके जवाब में, संजय राउत ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एक याचिका दायर कर दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की। राउत का कहना है कि उन्होंने महिलाओं के लिए कोई अपमानजनक बयान नहीं दिया।  

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