
वाशिंगटन। अमेरिकी राजनयिक और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हेनरी किसिंजर की मौत हो गई है। उन्होंने 100 साल की उम्र में दुनिया से विदा ली। किसिंजर ने अमेरिका के दो राष्ट्रपतियों के अधीन काम किया। उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति पर अमिट छाप छोड़ी। बुधवार को कनेक्टिकट स्थित अपने घर में किंसिजर की मौत हुई। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान का पक्ष लेने के चलते किसिंजर की काफी आलोचना की गई थी।
किसिंजर का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। समर्थक शानदार रणनीतिकार के रूप में उनकी प्रशंसा करते हैं। वहीं, आलोचक मास्टर मैनिपुलेटर बताकर उनकी निंदा करते हैं। किसिंजर ने सोवियत संघ के साथ डिटेंट की नीति का नेतृत्व किया था। उन्होंने चीन के साथ मेल-मिलाप शुरू किया था। उन्हें वियतनाम में अमेरिकी भागीदारी को समाप्त करने के लिए पेरिस शांति समझौते पर बातचीत करने के लिए 1973 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।
जुलाई में किसिंजर से मिले थे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
1969 में कंबोडिया और लाओस पर बमबारी सहित उनकी अन्य नीतियां विवादों में रही। पत्रकार सेमुर हर्श ने 2002 में दावा किया था, "हेनरी किसिंजर का काला पक्ष बहुत, बहुत काला है।" सार्वजनिक जीवन छोड़ने के बाद भी उन्होंने अपना वैश्विक प्रभाव बखूबी बनाए रखा। जुलाई में बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उन्होंने मुलाकात की।
जिनपिंग ने किसिंजर से मिलने के बाद कहा था, "चीनी लोग अपने पुराने दोस्तों को कभी नहीं भूलते हैं। चीन-अमेरिका संबंध हमेशा हेनरी किसिंजर के नाम से जुड़े रहेंगे।" दरअसल, किसिंजर ने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और गेराल्ड फोर्ड की सरकार में अमेरिका और चीन के बीच राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी।
अमेरिकी सेना में किसिंजर ने दी थी सेवा
किसिंजर के परिवार में उनकी पत्नी नैन्सी हैं, जिनसे उन्होंने 1974 में शादी की थी। उनकी पहली शादी से दो बच्चे डेविड और एलिजाबेथ हैं। किसिंजर का जन्म 27 मई 1923 को जर्मनी के बवेरिया के फर्थ में हुआ था। न्यूयॉर्क के सिटी कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्होंने अमेरिकी नागरिक बनकर अमेरिकी सेना में सेवा की। इसके बाद हार्वर्ड में दाखिला लिया। उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री हासिल की।
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