
नैनीताल। कोरोना महामारी के बीच चुनावों को टालने वाली मांग पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- चुनाव स्थगित करना अदालत का काम नहीं है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा और जस्टिस एनएस धनिक की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करते हुए रैलियों पर प्रतिबंध लगाने वाला निर्देश भी देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा- चुनाव स्थगित करना अदालत का काम नहीं है। भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने पहले ही कुछ निर्देश दिए हैं। यह एक ऐसी संस्था है, जो अद्वितीय है। चुनाव आयोग एक सराहनीय काम कर रहा है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 14 फरवरी, 2022 को होने हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने यहां प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।
चुनाव स्थगित न करने के आयोग के तर्क
चुनाव आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता शोभित सहरिया ने अदालत को बताया कि चुनावी राज्यों में 15 जनवरी तक रैलियों पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। चुनाव आयोग स्थिति का जायजा लेने के बाद आगे और दिशा-निर्देश जारी करेगा। सहरिया ने बताया कि चुनाव आयेाग ने पहले ही ऑनलाइन नामांकन की अनुमति दे दी है और यदि कोई उम्मीदवार स्वयं जाकर नामांकन करवाता है तो उसके साथ आने वालों की संख्या सीमित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई अन्य कदमों के साथ स्टार प्रचारकों की संख्या पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
बढ़ते कोविड मामलों को लेकर चुनाव स्थगित करने की मांग
उच्च न्यायालय राज्य के कोविड -19 महामारी से निपटने से संबंधित जनहित याचिका (PIL) याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा था। इन जनहित याचिकाओं में अधिवक्ता शिव भट्ट ने एक आवेदन दिया था। इसमें COVID-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव स्थगित करने की मांग की गई थी। इस मामले में कोर्ट ने 29 दिसंबर, 2021 को याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था।
वीडियो और तस्वीरों से बताया, कैसे टूट रहीं कोविड गाइडलान
आवेदन में कहा गया है कि नया ओमीक्रोन वैरिएंट (Omicron Variant) संस्करण कोविड के किसी भी अन्य संस्करण की तुलना में 300% तेजी से फैल रहा है। इसलिए, लोगों के जीवन की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि चुनावी रैलियों जैसी बड़ी सभाओं से बचा जाए। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों द्वारा विशाल 'चुनाव रैलियां' आयोजित की जा रही हैं। इन राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियों में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया और न ही लोगों ने मास्क पहना है। तस्वीरें और वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। इस मामले पर 15 फरवरी को फिर विचार किया जाएगा।
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