
नई दिल्ली. साल के 365 दिन किसी न किसी घटना के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं और एक नवंबर का दिन दो बड़ी घटनाओं का गवाहा रहा है। 31 अक्टूबर 1984 के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों के हाथों हुई हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में एक नवंबर को दंगे भड़क उठे। ये दंगे सिख समुदाय को एक ऐसी टीस दे गए, जिसका दर्द आने वाली कई पीढ़ियों को सताता आ रहा है।
हजारों लोग चढ़े थे हिंसा की भेंट
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद शुरू हुए दंगों में कई लोगों के मारे जाने की बात सामने आई है। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में 3,350 लोगों की मौत की बात सामने आई है।
यहां था सबसे ज्यादा असर
सिखों के खिलाफ हिंसा का असर देश के उन तमाम इलाकों में रहा जहां सिख समुदाय रहता था। हालांकि दिल्ली और उत्तर के तमाम इलाकों में हत्या और लूटपाट की ज्यादा घटनाएं हुईं। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में दंगों का सबसे ज्यादा असर रहा।
सिखों का अपमान भी हुआ
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्मादी भीड़ ने सिखों की दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। जमकर लूटपाट हुई। सिखों का अपमान भी किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि दंगों के दौरान कैसे सिख अपनी पहचान छुपाने के लिए केस तक कटाने पर मजबूर हुए थे।
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