
जेमिथांग (अरुणाचल प्रदेश)। अवैध रूप से तिब्बत पर कब्जा करने के बाद अरुणाचल प्रदेश के इलाकों पर दावेदारी कर रहे चीन को हिमालय क्षेत्र के शीर्ष बौद्ध नेताओं ने कड़ा संदेश दिया है। चीन ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के 11 जगहों का नाम बदलने का प्रयास किया है।
बौद्ध नेताओं के एक समूह ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया। वे अरुणाचल प्रदेश में आयोजित किए जा रहे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के गोरसम स्तूप के जेमिथांग में नालंदा बौद्ध परंपरा पर यह सम्मेलन आयोजित किया गया था।
बैठक में शामिल हुए 600 प्रतिनिधी
ऐसा कम ही होता है जब टॉप हिमालयी बौद्ध नेता अरुणाचल प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में एक साथ आएं। सोमवार को हुई बैठक को चीन को स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दिन भर चली बैठक में करीब 600 प्रतिनिधी शामिल हुए। अरुणाचल प्रदेश का जेमिथांग भारत-चीन सीमा पर भारत का आखिरी गांव है।
CM पेमा खांडू ने कहा- होना चाहिए बौद्ध संस्कृति का संरक्षण
बैठक में अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बौद्ध संस्कृति प्रत्येक प्राणी के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व विश्वास करती है। इसे न केवल संरक्षित किया जाना चाहिए बल्कि उसका प्रचार-प्रसार भी किया जाना चाहिए। राज्य में बौद्ध आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। उन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखा है।
चीन के साथ लगी सीमा पर है तनाव
दिसंबर 2022 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में LAC (Line of Actual Control) पर चीनी सैनिकों की भारतीय सेना के साथ झड़प हुई थी। इसके बाद से सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती की गई है। तवांग सेक्टर में हुई झड़प के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि चीनी सैनिकों ने एलएसी पर यथास्थिति को एकतरफा बदलने की कोशिश की। भारतीय जवानों ने इसे सफलतापूर्वक विफल कर दिया।
स्रोत- आवाज द वॉइस
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