
गंगटोक. सिक्किम में सीमा पर भारतीय और चीन सेना के जवान आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच झड़प भी हो गई। इसमें दोनों ओर के जवानों को चोटें आईं हैं। भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि नॉर्थ सिक्किम इलाके में भारत और चीन के सैनिकों में टकराव हुआ। दोनों ओर से भारी तनाव और बहसबाजी हुई। इस घटना में दोनों तरफ के सैनिकों को मामूली चोटें भी आई हैं। हालांकि इस झगड़े को स्थानीय स्तर के हस्तक्षेप के बाद सुलझा लिया गया।
सूत्रों ने बताया, कुछ देर चली बातचीत के बाद दोनों तरफ के सैनिक अपनी-अपनी पोस्ट पर वापस लौट गए। सेना के सूत्रों ने बताया कि सीमा विवाद के चलते सैनिकों के बीच ऐसे छोटे-मोटे विवाद अक्सर होते रहते हैं। सूत्रों की मानें तो लंबे समय बाद नॉर्थ सिक्किम इलाके में भारत और चीन के सैनिकों के बीच ऐसे तनाव देखने को मिला। जब कभी ऐसा कोई विवाद होता है तो तय प्रोटोकॉल के मुताबिक दोनों सेनाएं इसे सुलझा लेती हैं।
सड़क निर्माण को लेकर जारी है तनातनी
चीनी सेना इस इलाके में सड़क निर्माण करने की कोशिश कर रही है। चीन पहले ही सामरिक लिहाज से बेहद अहम माने जाने वाले चुंबी घाटी इलाके में सड़क बना चुका है, जिसे वह और विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। यह सड़क भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर या कथित 'चिकन नेक' इलाके से महज पांच किमी दूर है। यह सिलिगुड़ी कॉरिडोर ही भारत को नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से जोड़ता है। इसी कारण से भारतीय सैनिकों और चीनी सेना के बीच अक्सर टकराव होता रहता है। साल 2017 में भी टकराव की यही वजह थी जब पीएलए के जवानों को विवादित इलाके में निर्माण कार्य करने से भारतीय सेना ने रोक दिया था।
साल 2017 में बनी थी भीषण तनाव की स्थिति
इससे पहले साल 2017 में दोनों देशों के बीच सिक्किम क्षेत्र में भीषण तनाव देखने को मिला था। तब यह इतना बढ़ा था कि भारत के शीर्ष सैन्य अफसरों ने कई दिनों तक इलाके में कैंपिंग की। इन अधिकारियों में 17 वीं डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी शामिल थे। दोनों देशों के सैनिकों के बीच धक्कामुक्की की घटना के बाद विदेश मंत्रालय और दिल्ली स्थित सैन्य मुख्यालय तक हलचल रही।
दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद
भारत का चीन के साथ सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। अक्सर चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं। हालांकि भारतीय सैनिकों की सतर्कता की वजह से वे इसमें कामयाब नहीं हो पाते और इस वजह से सीमा पर ही दोनों में टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। भारत और चीन के बीच चार हजार किलोमीटर से अधिक लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तीन सेक्टरों पूर्वी, मध्य और पश्चिमी सेक्टर में बंटी है।
पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश का इलाका पड़ता है जिसके 90 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके पर चीन अपना कब्जा बताता है। मध्य सेक्टर में उत्तराखंड, हिमाचल और सिक्किम हैं। इस इलाके में भी उत्तराखंड के बाराहुती क्षेत्र पर चीन दावा बताता है। पश्चिमी सेक्टर में लद्दाख और अक्साई चिन का इलाका है।
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