President of India's address: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया देश को संबोधित, कहा-हमारे लिए लोकतंत्र और संविधान सर्वोपरि

Published : Aug 14, 2025, 07:29 PM ISTUpdated : Aug 14, 2025, 07:39 PM IST
Draupadi Murmu

सार

79th Independence day: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया।

President of India's address: देश 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। आजादी दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया। पूर्व संध्या पर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमारे लिए हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है। भारत-भूमि, विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती रही है। इसे लोकतंत्र की जननी भी कहा जाता है। हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जिनसे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत ने पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण और अमानवीय हमले का दृढ़ निश्चय और निर्णायकता के साथ ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से जवाब दिया जिससे पता चला कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हमारी सेनाएं किसी भी स्थिति का सामना कर सकती हैं।

 

 

15 अगस्त हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पंद्रह अगस्त हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। औपनिवेशिक शासन के लंबे वर्षों के दौरान, भारतीयों की कई पीढ़ियों ने स्वतंत्रता दिवस का सपना देखा था। देश के सभी हिस्सों के पुरुष और महिलाएं, बूढ़े और जवान, विदेशी शासन के बंधन को तोड़ फेंकने के लिए तरस रहे थे। उनके संघर्ष में प्रबल आशावाद झलकता था, जिसने स्वतंत्रता के बाद से हमारी प्रगति को गति दी है। कल जब हम तिरंगे को सलामी देंगे तो हम उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे जिनके बलिदान से 78 साल पहले 15 अगस्त को भारत को स्वतंत्रता मिली थी।

विभिन्न वर्गों में हमने समान मताधिकार दिया

भारत की मज़बूत लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान के प्रति श्रद्धा पर ज़ोर देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में, हमने मतदान के अधिकार को सुनिश्चित करते हुए विभिन्न वर्गों के बीच भेदभाव नहीं किया। हमारे संविधान में चार मूल्य हमारे लोकतंत्र को बनाए रखने वाले चार स्तंभों के रूप में समाहित हैं। ये हैं - न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व। ये हमारे सभ्यतागत सिद्धांत हैं जिन्हें हमने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पुनः खोजा। मेरा मानना है कि इन सबके मूल में मानवीय गरिमा की भावना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य समान है और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। सभी को स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक समान पहुंच होनी चाहिए। सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। जो लोग पारंपरिक रूप से वंचित रहे हैं, उन्हें मदद की ज़रूरत है। इन सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए, हमने 1947 में एक नई यात्रा शुरू की।

महंगाई नियंत्रण में, एक्सपोर्ट बढ़ा

राष्ट्रपति ने कहा कि देश में मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और निर्यात बढ़ रहा है। सभी प्रमुख संकेतक भारतीय अर्थव्यवस्था को अच्छी स्थिति में दिखा रहे हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रगति पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी दृष्टिकोण को मज़बूत किया। स्वदेशी दृष्टिकोण मेक इन इंडिया और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों को प्रेरित कर रहा है। हमें घरेलू उत्पादों को खरीदने और उपभोग करने का संकल्प लेना होगा।

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