“जब होगा तब देखा जाएगा…” अमेरिका के 500 प्रतिशत टैरिफ की चेतावनी पर क्या बोले जयशंकर

Published : Jul 03, 2025, 03:34 PM ISTUpdated : Jul 03, 2025, 03:36 PM IST
S Jaishankar

सार

US 500% Tariff: अमेरिका द्वारा रूस से सामान खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने की चेतावनी पर भारत ने चिंता जताई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर अमेरिकी सांसदों से बातचीत की है और भारत के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया है।

US 500% Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से सामान खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। इस बयान के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2 जुलाई 2025 को वॉशिंगटन डीसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को अमेरिका के उस प्रस्ताव पर चिंता जताई, जिसमें रूस से तेल या अन्य सामान खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैक्स लगाने की बात कही गई है।

अमेरिकी सीनेट में मिला 82 सांसदों का समर्थन

यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद में पेश किया गया है। इसका मकसद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन के मुद्दे पर बातचीत का दबाव बनाना और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय बातचीत में मजबूत स्थिति देना है। इस बिल को दो अमेरिकी सांसदों रिपब्लिकन लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है। इसे अमेरिकी सीनेट में 82 सांसदों का समर्थन मिल चुका है।

70% कच्चा तेल रूस से खरीदता है भारत

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि भले ही यह बिल अमेरिकी संसद से पास हो जाए लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के पास इसे साइन करने या ना करने का अधिकार होगा। अमेरिका में रूस पर लाए गए एक नए बिल को लेकर भारत में चिंता जताई जा रही है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 70% कच्चा तेल रूस से खरीदता है।

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500 फीसदी तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका

इस बिल के तहत जो देश रूस से तेल, गैस, यूरेनियम या अन्य सामान खरीदते हैं उन पर अमेरिका 500 फीसदी तक टैरिफ लगा सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन डीसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम के संपर्क में है, जिन्होंने ये बिल पेश किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और हितों को लेकर अपनी चिंता अमेरिकी सांसद को साफ तौर पर बता दी है।

जयशंकर ने कहा, “अगर ये स्थिति आती है, तो हम उस समय इसका समाधान देखेंगे। लेकिन अभी तक हम लगातार संपर्क में हैं और हमारी बात पहुंचाई जा चुकी है।” भारत फिलहाल इस बिल पर नजर बनाए हुए है और अगर भविष्य में यह भारत के हितों को प्रभावित करता है तो जरूरी कदम उठाया जाएगा।

 

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