हमला करने आ रहे ड्रोनों के झुंड को पलभर में तबाह करेगा भारत का भार्गवास्त्र, जानें कैसे करता है काम

Published : May 14, 2025, 04:54 PM ISTUpdated : May 14, 2025, 04:59 PM IST
Bhargavastra

सार

भारत ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए 'भार्गवास्त्र' नामक एक शक्तिशाली रक्षा प्रणाली विकसित की है। इस कम लागत वाली प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया है, जो दुश्मन ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर सकती है।

Bhargavastra: आज के समय होने वाली लड़ाई में ड्रोन बड़ी चुनौती हैं। बड़े झुंड में आने वाले ड्रोनों को मार गिराने के लिए भारत ने भार्गवास्त्र (Bhargavastra) नाम का बेहद ताकतवर हथियार सिस्टम तैयार किया है। यह कम लागत वाली काउंटर-ड्रोन सिस्टम है। बुधवार को इसका सफल टेस्ट किया गया।

गोपालपुर में सीवर्ड फायरिंग रेंज में मंगलवार को भार्गवास्त्र सिस्टम के माइक्रो रॉकेट का सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया। इसने पहले से तय किए गए सभी लक्ष्यों को पूरा किया। भार्गवास्त्र हमला करने आ रहे ड्रोन को हार्ड किल तरीके से खत्म करता है। इसका रेंज 2.5km है। यह छोटे ड्रोनों का भी पता लगा सकता है और उसे हवा में ही नष्ट कर सकता है।

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने बनाया है भार्गवास्त्र

भार्गवास्त्र रॉकेट को SDAL (Solar Defence and Aerospace Limited) ने विकसित किया है। इसके तीन टेस्ट किए गए हैं। सेना के अधिकारियों के सामने एक-एक रॉकेट दागकर दो टेस्ट किए गए। एक टेस्ट दो सेकंड के भीतर साल्वो मोड में दो रॉकेट दागे गए। सभी चार रॉकेटों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।

भार्गवास्त्र एयर डिफेंस सिस्टम में पहली परत के रूप में काम करेगा। इसका छोटा रॉकेट अनगाइडेड है। यह छोटे ड्रोनों के झुंड को खत्म कर सकता है। यह हमलावर ड्रोन पर सटीक निशाना लगाता है। भार्गवास्त्र को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जा सकता है। यह पाकिस्तान और चीन से लगी सीमा पर आसानी से तैनात होगा।

भार्गवास्त्र स्वदेशी रॉकेट या माइक्रो-मिसाइल है। इसमें जैमिंग और स्पूफिंग को शामिल करने के लिए एक अतिरिक्त सॉफ्ट-किल परत जोड़ी जा सकती है। इससे भारत की सेनाओं को सुरक्षा की अतिरिक्त परत मिलेगी।

भार्गवास्त्र सिस्टम मॉड्यूलर है। इसके सेंसर (रडार, ईओ और आरएफ रिसीवर) और शूटर को यूजर की जरूरत के अनुसार कॉन्फिगर किया जा सकता है। इसे लेयर्ड और टियर्ड एडी कवर के लिए एकीकृत तरीके से काम करने के लिए बनाया जा सकता है। इससे लंबी दूरी पर लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा, सिस्टम को मौजूदा नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है।

 

 

कैसे काम करता है भार्गवास्त्र?

ड्रोन को खत्म करने के लिए दो तरीके अपनाए जाते हैं। पहला है सॉफ्ट किल और दूसरा है हार्ड किल। सॉफ्ट किल तरीके में हमलावर ड्रोन के कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के सिस्टम से ड्रोन भटकाया जाता है। उसे रोका जाता है। इसमें बिना कोई मिसाइल, रॉकेट या गोली चलाए ड्रोन को गिरा दिया जाता है।

हार्ड किल तरीके में हमलावर ड्रोन को मिसाइल, रॉकेट या गोली जैसे प्रत्यक्ष हथियार से मारकर गिराया जाता है। भार्गवास्त्र ड्रोन को गिराने के लिए हार्ड किल तरीके का इस्तेमाल करता है। यह छोटा रॉकेट है। इस जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल की तुलना में कम महंगा है। इससे बड़ी संख्या में एक साथ आने वाले ड्रोनों को खत्म करना ज्यादा सुविधाजनक होगा। भार्गवास्त्र का रडार पहले ड्रोन का पता लगाकर उसे ट्रैक करता है। इसके बाद रॉकेट लॉन्च होता है और वह ड्रोन को मार गिराता है। यह सिस्टम पल भर में ड्रोन के झुंड का सफाया कर सकता है।

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

Earthquake Today: भारत-म्यांमार सीमा के पास तगड़ा भूकंप, कोलकाता तक महसूस हुए झटके
नोएडा की डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने श्रीलंका में जीता एशिया आइकॉन अवॉर्ड, हिंदी साहित्य को मिली ग्लोबल पहचान