
26/11 Mumbai Attack Hero: 26 नवंबर 2008 की रात मुंबई में आतंक का ऐसा दौर आया जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। लश्कर-ए-तैयबा के दस आतंकवादियों ने शहर में 12 अलग-अलग जगहों पर हमला किया। इस हमले में 159 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हुए। लेकिन इस अंधेरी रात में एक गुमनाम हीरो खड़ा था-कैप्टन रवि धरनीधिरका, एक भारतीय-अमेरिकी US मरीन, जिसने 157 डरे हुए लोगों की जान बचाई।
रवि धरनीधिरका US मरीन कॉर्प्स में कैप्टन रह चुके हैं और इराक में 200 से ज्यादा लड़ाकू मिशन कर चुके हैं, जिनमें 2004 की फालुजा घेराबंदी भी शामिल थी। नवंबर 2008 में, 31 साल के रवि अपने परिवार के साथ मुंबई आए थे और बधवार पार्क के पास छुट्टियाँ बिताने की सोच रहे थे। लेकिन किस्मत ने उन्हें कुछ और ही तय किया था।
रवि अपने चाचाओं और चचेरे भाइयों के साथ ताज होटल के 20वीं मंजिल स्थित लेबनानी रूफटॉप रेस्टोरेंट में पहुंचे। जैसे ही वे अंदर गए, उन्हें अजीब बेचैनी महसूस हुई। मेटल डिटेक्टर बीप हुआ, लेकिन सिक्योरिटी ने उन्हें अंदर जाने दिया। इसके तुरंत बाद खबर मिली कि ताज होटल पर हमला हो गया है।
रवि ने तुरंत जंग के मैदान में कदम रखा। उन्होंने साउथ अफ़्रीकी एक्स-कमांडो के साथ मिलकर कमान संभाली। उन्होंने फायर स्टेयरवेल, कॉन्फ्रेंस हॉल और किचन का इस्तेमाल कर लोगों को सुरक्षित रास्ते से बाहर निकाला। हर कदम पर उन्होंने सावधानी बरती, पर्दे खींचे, फ़ोन म्यूट किए और दरवाज़ों को फ़र्नीचर से बैरिकेड किया।
होटल में धमाके हो रहे थे और आग की लपटें बढ़ रही थीं। पावर ग्रिड फेल होने का डर और आतंकवादियों की फायरपावर किसी भी पल जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन रवि ने धैर्य और तेज़ सोच से सबको सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने 84 साल की बुजुर्ग महिला को भी पीछे नहीं छोड़ा और खुद सबसे आखिरी में बाहर निकले।
157 लोगों को बचाना आसान काम नहीं था। यह कहानी केवल साहस की नहीं बल्कि योजना, अनुशासन और मानवता की मिसाल है। रवि ने मुंबई के उस सबसे खतरनाक वॉरज़ोन में अपने अनुभव और धैर्य से न केवल लोगों की जान बचाई, बल्कि एक गुमनाम हीरो के रूप में इतिहास में अपनी जगह बनाई।
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