Dutch Nobel Prize. भारतीय मूल की प्रोफेसर जोइता गुप्ता ने 'डच नोबेल प्राइज' जीतकर पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। भारतीय मूल की प्रोफेसर जोइता गुप्ता को 'न्यायसंगत और टिकाऊ दुनिया' (just and sustainable world) पर केंद्रित उनके वैज्ञानिक कार्य के लिए डच विज्ञान में सर्वोच्च सम्मान स्पिनोजा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इससे पहले जोइता के कई शोध कार्यों को भी सराहना मिल चुकी है।
कौन हैं भारतीय मूल की प्रोफेसर जोइता गुप्ता
जोइता गुप्ता 2013 से एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के ग्लोबल साउथ में पर्यावरण और विकास की प्रोफेसर हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय के साथ ही हार्वर्ड लॉ स्कूल में पढ़ाई की है। जोइता गुप्ता ने व्रीजे यूनिवर्सिटी एम्स्टर्डम से पीएचडी की उपाधि ली है। वे आईएचई डेल्फ़्ट इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर एजुकेशन में प्रोफेसर भी रह चुकी हैं। विश्वविद्यालय के बयान में कहा गया है कि अपनी प्रोफेसरशिप के अलावा गुप्ता फ्यूचर अर्थ द्वारा स्थापित और ग्लोबल चैलेंज फाउंडेशन द्वारा समर्थित पृथ्वी आयोग की सह-अध्यक्ष हैं।
जोइता गुप्ता ने किस विषय पर की रिसर्च
प्रोफेसर जोइता गुप्ता को डच रिसर्च काउंसिल (NWO) की चयन समिति द्वारा उनके 'incredibly broad and interdisciplinary' रिसर्च के लिए चुना गया है। सामान्य तौर पर इस डच नोबेल प्राइज कहा जाता है। इस पुरस्कार के साथ प्रोफेसर जोइता गुप्ता को 1.5 मिलियन यूरो की ईनामी राशि भी मिलेगी। यह राशि उनके वैज्ञानिक अनुसंधान और नॉलेज से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने के लिए दी जाएगी। इनके रिसर्च में गवर्नेंस के माध्यम से जलवायु परिवर्तन द्वारा उत्पन्न कई तरह के मुद्दों का समाधान शामिल है। एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि प्रोफेसर गुप्ता के रिसर्च के मूल में जलवायु संकट, वैश्विक जल चुनौतियां, संभावित समाधान और न्याय के बीच संबंधों को आसानी से जानने का प्रयास किया गया है।
क्या कहते हैं एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर
एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी के पीटर-पॉल ने कहा कि जोइता के काम में लोगों और प्लैनट दोनों के लिए न्याय का सामान्य सूत्र है। वह लगातार जलवायु न्याय के लिए प्रतिबद्ध हैं और हमेशा विषयों की सीमाओं से परे देखती है। वे महसूस करती हैं कि जलवायु मुद्दे से निपटने का यही एकमात्र तरीका है। जोइता यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय की 12वीं शोधकर्ता हैं। इसी साल 4 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें सम्मान दिया जाएगा।
कंटेंट सोर्स- आवाज द वॉयस
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