
नई दिल्ली [भारत], 30 जून (एएनआई): भारतीय रेलवे ने पूर्वी रेलवे के आसनसोल डिवीजन के हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) रूट पर 27 स्टेशनों/केबिनों (1 आईबीएस लोकेशन सहित) में रिले-बेस्ड इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) से बदलने के लिए 432 करोड़ रुपये की एक परियोजना को मंजूरी दी है। इस स्वीकृत कार्य में 28 रिले-बेस्ड इंटरलॉकिंग इंस्टॉलेशन (27 पीआई/आरआरआई और 1 आईबीएस) को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से बदलना शामिल है, जिससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता में काफी वृद्धि होगी।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के एचडीएन/एचयूएन मार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रदान करने के चल रहे कार्यक्रम का हिस्सा है, जहां कवच, ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (सीटीसी) जैसी उन्नत सिग्नलिंग प्रणालियों को लागू किया जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है जो पुराने रिले-बेस्ड सिस्टम को कंप्यूटर-आधारित इंटरलॉकिंग से बदल देती है, जिससे उच्च विश्वसनीयता, तेज फॉल्ट डायग्नोसिस, आसान रखरखाव और बेहतर परिचालन लचीलापन सुनिश्चित होता है। यह परियोजना रेलवे सुरक्षा को और मजबूत करेगी, साथ ही नेटवर्क के सबसे व्यस्त खंडों में से एक पर उच्च लाइन क्षमता और अधिक कुशल ट्रेन संचालन का समर्थन करेगी।
इस बीच, भारतीय रेलवे की डिजिटल संचार रीढ़ को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय रेलवे ने 200 करोड़ रुपये की लागत से दक्षिण पूर्व रेलवे में बैलेंस 48-फाइबर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के प्रावधान को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना दक्षिण पूर्व रेलवे के चार प्रमुख डिवीजनों में 1,696.2 रूट किलोमीटर (आरकेएम) पर 48-फाइबर ओएफसी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जो सुरक्षित, कुशल और प्रौद्योगिकी-संचालित रेलवे संचालन का समर्थन करने वाले संचार नेटवर्क को मजबूत करेगी। (एएनआई)
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