
नई दिल्ली। यूक्रेन (Ukraine) के उत्तरपूर्वी शहर सूमी (Sumy) में एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास (Medical College Hostel) में फंसे भारतीय छात्रों की मदद के लिए एक टीम भेजी गई है। भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने फंसे सभी छात्रों को अल्प समय की सूचना पाते ही तत्काल पहुंचने के लिए तैयार रहने को कहा है। दूतावास ने कहा कि पोल्टावा (Poltava) में एक टीम तैनात की गई है। यह टीम सुमी से करीब तीन घंटे की ड्राइव से छात्रों को सेफ पहुंचाने का इंतजाम करने के लिए कोआर्डिनेट करेगी। दरअसल, शहर में लगातार गोलाबारी हो रही है।
छात्रों ने कहा कि अब सहा नहीं जा रहा
छात्र जहां फंसे हैं, वह शहर रूस की गोलाबारी का सामना कर रहा है। गोलाबारी से प्रभावित शहर से छात्रों की सुरक्षित निकासी अधिकारियों के लिए एक चुनौती बनी हुई है। उधर, छात्र अब मौसम की मार, खाना-पानी के शार्टेज और गोलाबारी से परेशान हैं। उनका कहना है कि वे अब कड़ाके की ठंड, खाद्य आपूर्ति में कमी और पीने के पानी के लिए बर्फ को पिघलाने का सामना नहीं कर सकते।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई चुनौतियां हैं सामने
विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा, "सुमी से भारतीयों को निकालने में मुख्य चुनौतियां गोलाबारी, हिंसा और परिवहन की कमी है।" इससे पहले शनिवार को, फंसे हुए छात्रों ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्होंने 50 किलोमीटर दूर रूसी सीमा तक एक जोखिम भरा यात्रा करने का फैसला किया है। हालाँकि, सरकार द्वारा उनसे संपर्क करने और अनावश्यक जोखिमों से बचने की सलाह देने के बाद उन्होंने रुकने का फैसला किया।
रूस और यूक्रेन से छात्रों को निकालने के लिए सीजफायर का आग्रह
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत यूक्रेन और रूस से आग्रह कर रहा है कि फरवरी के अंत में यूक्रेन पर रूसी सैनिकों के हमले के बाद फंसे लगभग 700 छात्रों को निकालने के लिए पूर्वोत्तर यूक्रेनी शहर में संघर्ष विराम लगाया जाए। भारत ने 26 फरवरी को शुरू किए गए मिशन ऑपरेशन गंगा के तहत 76 उड़ानों में अपने 15,920 से अधिक नागरिकों को वापस लाया है।
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