भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम एस' श्रीहरिकोटा से होगा लॉन्च, जानें किस कंपनी ने किया तैयार

Published : Nov 08, 2022, 05:41 PM IST
भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम एस' श्रीहरिकोटा से होगा लॉन्च, जानें किस कंपनी ने किया तैयार

सार

देश में पहली बार निजी स्पेस कंपनी का रॉकेट 'विक्रम एस' 12 से 16 नवंबर के बीच लॉन्च होने जा रहा है। इस बात की जानकारी मंगलवार को हैदराबाद के स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने दी। बता दें कि इस प्राइवेट रॉकेट को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा लॉन्च पैड से छोड़ा जाएगा।

नई दिल्ली/हैदराबाद। देश में पहली बार निजी स्पेस कंपनी का रॉकेट 'विक्रम एस' 12 से 16 नवंबर के बीच लॉन्च होने जा रहा है। इस बात की जानकारी मंगलवार को हैदराबाद के स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने दी। बता दें कि इस प्राइवेट रॉकेट को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा लॉन्च पैड से छोड़ा जाएगा। बता दें कि विक्रम-एस रॉकेट की यह टेस्ट फ्लाइट है, जो सब-ऑर्बिटल होगी। 

स्काईरूट एयरोस्पेस ने किया तैयार : 
बता दें कि इस मिशन के साथ, स्काईरूट एयरोस्पेस अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाली भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी बनने जा रही है। यह अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत की तरह है। स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ और सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना के मुताबिक, इसे 12 से 16 नवंबर के बीच लॉन्च किया जाएगा। हालांकि, तारीख की अंतिम पुष्टि मौसम की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। 

फिलहाल इसे टेस्ट फ्लाइट की तरह किया जाएगा लॉन्च : 
विक्रम-एस रॉकेट एक सिंगल-स्टेज सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जो अपने साथ 3 कॉमर्शियल पेलोड्स लेकर जा रहा है। यह एक तरह की टेस्ट फ्लाइट है। अगर इसमें कामयाबी मिलती है, तो भारत का नाम प्राइवेट स्पेस कंपनी के रॉकेट लॉन्चिंग के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा। बता दें कि स्काईरूट अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स लॉन्च करने के लिए स्पेस लॉन्च व्हीकल बनाती है। 

मिशन का नाम 'प्रारंभ' : 
विक्रम-एस रॉकेट का नाम भारत के मशहूर वैज्ञानिक और इसरो के संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला मिशन है, जिसका नाम 'प्रारंभ' यानी शुरुआत है। बता दें कि इस लॉन्च के लिए स्काईरूट और इसरो के बीच एक समझौता हुआ है। स्काईरूट के सीईओ चांदना का कहना है कि इसरो और IN-SPACe की मदद के चलते ही हम इतने कम समय में विक्रम-एस रॉकेट मिशन को तैयार कर सके हैं। 

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