
नई दिल्ली. अमेरिकी नेवी ने बगैर परमिशन भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में अभ्यास करके दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट घोल दी है। यही नहीं, जब भारत ने इस पर आपत्ति जताई, तो अमेरिकी नौसेना ने धमकीभरे अंदाज में कहा कि वह फ्रीडम ऑफ नेविगेशन ऑपरेशंस करती रहेगी। US नेवी के सातवें बेड़े ने अपने बयान में कहा कि 7 अप्रैल को युद्धपोत USS जॉन पॉल जोन्स ने लक्षद्वीप से 130 समुद्री मील की दूरी पर भारतीय इलाके में एक्सरसाइज की। अमेरिकी नेवी इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक मानती है।
भारत ने जताई आपत्ति...
बता दें कि जब यह अभ्यास किया जा रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर रहे थे। यह अभ्यास अमेरिका की 7वीं फ्लीट ने किया। यह अमेरिका की नेवी का सबसे बड़ा बेड़ा है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान बंगाल की खाड़ी में भी यह तैनात किया गया था। मकसद भारत पर दवाब बनाना था।
7 अप्रैल को क्लाइमेट मामलों के अमेरिकी राजदूत जॉन कैरी भारत दौरे पर थे। जब वे मोदी से मिलने वाले थे, तभी अमेरिकी नेवी का युद्धपोत USS जॉन पॉल जोन्स (DDG 53) यानी डिस्ट्रॉयर यह अभ्यास कर रहा था।
- इस संबंध में UN(यूनाइटेड नेशन) ने एक समुद्री कानून बना रखा है। इसके अनुसार, समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील (370 किमी) तक EEZ यानी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन कहलाता है। जहां अमेरिकी नेवी ने अभ्यास किया, वो भारत के EEZ में आता है। ऐसे में अमेरिकी नेवी को इसके लिए भारत से परमिशन लेनी थी। अमेरिकी जहाज 130 नॉटिकल मील (240 किमी) तक घुस आया था। अमेरिकी नौसेना 1979 से इस तरह के ऑपरेशन करती आ रही है।
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