
नई दिल्ली. रक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को भारत आने का न्यौता दिया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) ने अमेरिकी कंपनियों को भारत की नीतिगत पहलों का लाभ उठाने तथा ‘मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के विजन को साकार करने के लिए भारत में रक्षा उपकरण के संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, विनिर्माण तथा रखरखाव करने के लिए आमंत्रित किया है। रक्षामंत्री ने 21 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए भारत में अमेरिकी वाणिज्य चैम्बर (एमचैम इंडिया) के सदस्यों को इसकी 30 वार्षिक आमसभा के दौरान संबोधित किया। रक्षामंत्री ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में सह-उत्पादन, सह-विकास, निवेश संवर्धन तथा रखरखाव मरम्मत के विकास तथा ओवरहॉल सुविधाओं के लिए भी आमंत्रित किया है।
भारतीय इंडस्ट्रीज में अमेरिका की रुचि बढ़ी
राजनाथ सिंह ने कहा हाल में कुछ अमेरिकी कंपनियों ने ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय उद्योगों के साथ हिस्सेदारी में अपनी उपस्थिति को बढ़ाया है। रक्षामंत्री ने कहा कि उनका यह विश्वास है कि यह महज एक शुरुआत है। बढ़ते व्यवसाय के साथ भारत में अमेरिकी कंपनियों द्वारा अधिक निवेशों की उम्मीद करते हैं।
इस मौके पर रक्षामंत्री ने प्रमुख मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) तथा भारतीय कंपनियों के बीच साझीदारियों को सुगम बनाने के लिए सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों की सूची प्रस्तुत की।
राजनाथ सिंह ने कहा कि एफडीआई सीमा में बढ़ोतरी से लेकर व्यवसाय करने की सुगमता में सुधार लाने तथा आईडेक्स प्लेटफॉर्म के जरिए नवोन्मेषण को प्रोत्साहित करने, भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार का ध्यान पूरी तरह भारत स्थित कंपनियों तथा संयुक्त उद्यमों द्वारा रक्षा विनिर्माण, निर्यात के हिस्से को बढ़ाने पर केन्द्रित है।
पांच वर्षों में 2.5 बिलियन डॉलर का योगदान
राजनाथ सिंह ने बताया कि अमेरिकी कंपनियां भारत में न केवल एफडीआई तथा रोजगार का स्रोत रही हैं, बल्कि वे भारत के रक्षा निर्यातों में भी योगदान दे रही हैं। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने 2.5 बिलियन डॉलर का योगदान दिया, जो इस अवधि के दौरान अर्जित कुल निर्यातों का 35 प्रतिशत है। उ
यह भी जानिए
रक्षामंत्री ने हाल में वाशिंगटन में हुए भारत-अमेरिका 2+2 मंत्री स्तरीय संवाद को सकारात्मक एवं सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र द्विपक्षीय संबंध का एक मजबूत और बढ़ता हुआ स्तंभ है।उन्होंने क्रेता-विक्रेता संबंध से साझीदार देशों तथा व्यवसाय साझीदारों की दिशा में बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आई है। यह वस्तु व्यापार में 113 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई है। इतिहास में पहली बार निर्यातित वस्तुओं में 400 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार लिया है।
यह भी पढ़ें
UPDATE: भारत के दौरे पर ब्रिटेन के PM बोरिस जॉनसन-साबरमती आश्रम में चलाया चरखा, गौतम अडानी से मिले
सिविल सेवा दिवस पर बोले PM मोदी-5 साल में खत्म किए 1500 ऐसे कानून, जो लोगों पर बोझ बने हुए थे
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.