ISRO ने तय की आदित्य-L1 की लांचिंग टाइम और डेट, जानें क्या है सोलर मिशन का उद्देश्य?

Published : Aug 29, 2023, 10:38 AM ISTUpdated : Aug 30, 2023, 06:49 PM IST
Aditya l1

सार

इसरो (ISRO) ने भारत के सौर मिशन आदित्य एल1 (Solar Mission Aditya L1) की लांचिंग डेट और टाइमिंग सेट कर दी है। यह सूर्य-पृथ्वी के बीच एक निश्चित दूरी से सौर मंडल का अध्ययन करेगा।

ISRO Solar Mission. ISRO ने अपने सोलर मिशन आदित्य-एल1 की लांचिंग डेट और टाइमिंग तय कर दी है। जानकारी के अनुसार आदित्य एल-1 सूर्य और पृथ्वी लैंग्रेज प्वाइंट एल1 पर एक निश्चित दूरी से सूर्य की गतिविधियों का अध्ययन करेगा। यह स्थान पृथ्वी से करीब 1.5 मिलियन यानि करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है। आइए जानते हैं कि क्या है इसरो के सोलर मिशन का उद्देश्य।

कब होगी आदित्य एल1 की लांचिंग

इसरो ने जानकारी दी है कि आदित्य एल-1 को 2 सितंबर 2023 को सुबह 11.50 बजे लांच किया जाएगा। यह सोलर मिशन को श्रीहरिकोटा से लांच किया जाएगा। आदित्य एल-1 अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला पहला भारतीय स्पेसक्रॉफ्ट होगा। सूर्य की स्टडी करने के लिए पहला स्पेस बेस्ड भारतीय लैब है। आदित्य एल-1 को सूर्य के चारों ओर बनने वाले कोरोना के रिमोट ऑब्जर्वेशन के लिए डिजाइन किया गया है।

 

 

क्या है एल1 प्वाइंट

अंतरिक्ष में एक प्वाइंट ऐसा है जहां ग्रैविटेशनल फोर्स की वजह से कोई भी स्पेसक्रॉफ्ट बैलेंस तरीके से बेहद कम ईंधन खर्च किए ही चक्कर लगा सकता है। एक जगह सुरक्षित टिका रह सकता है। इसे अंतरिक्ष का पार्किंग भी कहा जा सकता है। यहां गुरुत्वाकर्षण बलों के संतुलित होने की वजह से वस्तुएं रुकी रहती हैं। यह वह प्वाइंट है जहां सूरज का ग्रैविटेशनल फोर्स और पृथ्वी का ग्रैविटेशनल फोर्स एक दूसरे को बैलेंस करते हैं। यानि कोई भी वस्तु इस जगह पर होती है तो दोनों तरफ का बल एक दूसरे को बैलेंस कर देता है। इस स्थिति को लैंग्रेज प्वाइंट कहा जाता है। लैगरेंज प्वाइंट्स का नाम इतालियन-फ्रांसीसी मैथेमेटिशियन जोसेफ लुई लैगरेंज के नाम पर किया गया।

क्या है सोलर मिशन का उद्देश्य

इसरो के अनुसार आदित्य-एल1 मिशन को सूर्य के ऊपरी वायुमंडल (क्रोमोस्फीयर और कोरोना) के साथ सौर हवा के साथ इसके संबंधों का अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य सौर वातावरण में मौजूद आयनित प्लाज्मा की भौतिकी का अध्ययन करना है। अंतरिक्ष यान उन तंत्रों की जांच करेगा जो सौर कोरोना को गर्म करते हैं। कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) और सौर फ्लेयर्स की शुरुआत और विकास का भी निरीक्षण किया जाएगा। यह सूर्य के आसपास के सीटू कण और प्लाज्मा का अध्ययन करेगा। साथ ही कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र की विशेषता भी बताएगा। यह मिशन अंतरिक्ष मौसम के मुख्य कारकों का अध्ययन और मूल्यांकन करेगा।

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