
नई दिल्ली. जामिया में हिंसा और उपद्रव पर कुलपति नजमा अख्तर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, "कल की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस बिना पूछे कैंपस के अंदर आई। पुलिस ने बर्बरता के साथ छात्रों को डाराया। यूनिवर्सिटी में बिना इजाजत पुलिस की एंट्री बर्दाश्त नहीं। बच्चों पर मानसिक असर पड़ा है। उसका जिम्मेदार कौन है। पुलिस ने लाइब्रेरी में लाठीचार्ज किया। यूनिवर्सिटी में घुसने पर एफआईआर कराएंगे। सबूतों को सामने रखेंगे।
बच्चों को डराने की कोशिश
वीसी ने कहा कि बहुत अफवाहें उड़ रही हैं, जिसमें से एक है कि एक बच्चे की मौत हुई है। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। बाहर कुछ हुआ तो जामिया का नाम लिया गया। कैंपस सिक्योर होना चाहिए। जामिया को टारगेट न किया जाए।
200 स्टूडेंट्स घायल हुए
उन्होंने कहा, "एक अफवाह चल रही है कि जामिया के 2 स्टूडेंट की मौत हुई है। हम इसका खंडन करते हैं। हमारे किसी स्टूडेंट की मौत नहीं हुई है। इस प्रदर्शन में करीब 200 स्टूडेंट्स घायल हुए हैं। आप संपत्ति का पुनर्निर्माण कर सकते हैं, लेकिन आप उन चीजों के लिए क्षतिपूर्ति नहीं कर सकते हैं जिस स्थिति से हमारे स्टूडेंट्स गुजरे हैं। हम उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं।"
बोतल पर बस की आग बुझाई : पुलिस
- डीसीपी साउथ ईस्ट दिल्ली चिन्मय बिस्वाल ने कहा, "मैं जामिया के छात्रों से अपील करता हूं, कि जब असामाजिक तत्व उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हों तो विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित होगी। विरोध शांतिपूर्ण और अनुशासित होना चाहिए।"
- बस जलाने के आरोप पर उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से झूठ है। जब भीड़ आग लगा रही थी, तो पुलिस ने स्थानीय निवासियों से पानी मांग कर आग बुझाने का प्रयास किया। जहां तक उस बस का सवाल है, पुलिस ने बोतल से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। एक पुलिसकर्मी आईसीयू में भर्ती है।"
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