उमर अब्दुल्लाह ने क्यों तोड़ी कसम? पहले तो चुनाव लड़ने से इनकार, अब किया ये काम

Published : Sep 06, 2024, 03:30 PM ISTUpdated : Sep 06, 2024, 03:32 PM IST
Omar Abdullah

सार

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने पहले राज्य का दर्जा वापस मिलने तक चुनाव न लड़ने की बात कही थी, लेकिन अब वे दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनके इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

नेशनल न्यूज। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने विधानसभा चुनाव पास आते-आते अपना इरादा बदल दिया है। अब्दुल्लाह ने कहा थी कि जब तक जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता तब तक वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। फिर अचनाक क्या हुआ कि उन्होंने अपनी कसम ही तोड़ दी और अब एक नहीं बल्कि दो-दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने गंदरबल और बडगांव दो जगहों से नामांकन भरा है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने निर्णय बदला है। आखिर क्यों तोड़नी पड़ी पूर्व सीएम को अपनी कसम?  

पूर्व सीएम ने ये खाई थी कसम
पूर्व सीएम ने कसम खाई थी कि जम्मू कश्मीर को जब तक पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता है तब तक वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने इस मांग को पूरा नहीं किया तो वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो जाएगी। 2019 में कश्मीर राज्य का अस्तित्व समाप्त हो गया था। चार अक्टूबर को चुनाव होने वाले हैं। मतगणना 8 अक्टूबर को होगी। माना जा रहा है राहुल गांधी के कहने पर ही उन्होंने चुनाव लड़ने का मन बनाया है। कांग्रेस किसी भी कीमत पर भाजपा को हराने के मामले में रिस्क नहीं लेना चाहती।

एक नहीं दो-दो जगहों से भरा नामांकन
अबल्दुल्लाह कहां पहले तो चुनाव ही नहीं लड़ने वाले थे और अब ऐसी यू टर्न लिया है कि एन नहीं दो-दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने गंदरबल और बड़गांव से पर्चा भरने के साथ हुंकार भरी है। पूर्व सीएम ने राहुल गांधी के जम्मू कश्मीर दौरे के बाद दो जगहों से चुनाव लड़ने का मन बनाया। 

राहुल के पदचिह्नों पर उमर अबदुल्ला भी 
उमर अब्दुल्लाह अब राहुल गांधी के पदचिह्नों पर चलते नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी भी दो बार से लोकसभा चुनाव में दो सीटों से लड़ते आ रहे है। ऐसा इसलिए भी किया जाता है कि यदि वह एक जगह से नहीं जीतते हैं तो दूसरी जगह विजय हासिल कर लें। हालांकि पूर्व सीएम इसे कमजोरी ने पार्टी को दोगुना मजबूती देने की कवायद कहते हैं।

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