
श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने तालिबान का उदाहरण देकर मोदी सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इस बात से सबक ले कि कैसे आतंकवादी समूह अफगानिस्तान से शक्तिशाली अमेरिका को बाहर निकाल सकता है। उन्होंने मोदी सरकार से कश्मीरियों के साथ बातचीत करने और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने का आग्रह किया।
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महबूबा मुफ्ती ने कहा- तालिबान ने नाटो और अन्य विदेशी शक्तियों को कैसे बाहर किया। लेकिन उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों से कहा- वे उस घाव को सहें जो धारा 370 को खत्म करने से हुआ है और इसका इस्तेमाल शांतिपूर्वक लड़ने के लिए करें। इससे पहले मुफ्ती ने कहा था कि जो संस्थान लोगों के अधिकारों की रक्षा और देश के संविधान को बनाए रखने के लिए बने हैं, उन्हें तालिबानी कर दिया गया है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनकी मां गुलशन नजीर से करीब तीन घंटे तक पूछताछ किए जाने के बाद वह पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रही थीं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से जिन संस्थानों से हमारे अधिकारों की रक्षा करने और भारत की भावना और संविधान को बनाए रखने की उम्मीद की गई थी, उनका तालिबानीकरण कर दिया गया है। मुख्यधारा के मीडिया का अधिकांश हिस्सा भाजपा के पक्ष में हवा दे रहा है, वे इस बारे में बात नहीं कर रहे हैं कि कैसे एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है और संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मैंने परिसीमन आयोग से मिलने से इनकार कर दिया, अगले दिन हमें समन मिला। मैंने 5 अगस्त को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया, अगले दिन हमें समन मिला। मुफ्ती ने कहा कि एनआईए और ईडी जैसी एजेंसियों को गंभीर काम करने के लिए कहा गया है। लेकिन दुर्भाग्य से इन एजेंसियों को हथियार बनाया जा रहा है और राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया कर्मियों और छात्रों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे वह सुधा भारद्वाज हो या दिशा, रवि या उमर खालिद या कोई राजनेता।
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