
उज्जैन. कानपुर में 8 पुलिसवालों का हत्यारा विकास दुबे मध्यप्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से की गई। जब एमपी पुलिस ने उसे पकड़ा तो वो मीडिया को देखते ही जोर-जोर से ये कहकर चिल्लाने लगा कि 'मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला...।' सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखने के लिए मिल रहा है कि उसके चिल्लाने के बाद एक पुलिस वाला उसे थप्पड़ भी जड़ देता है। विकास दुबे पिछले 3 दिन से दिल्ली-एनसीआर में रहकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस को चमका देता रहा।
नोएडा में किसी निजी चैनल के जरिए करने वाला था सरेंडर
विकास दुबे को लेकर बुधवार शाम यह खबर भी मीडिया में आने लगी थी कि गैंगस्टर विकास दुबे नोएडा सेक्टर-16 स्थित किसी निजी न्यूज चैनल में मीडिया के जरिए समर्पण कर सकता है। अब उसकी उज्जैन से गिरफ्तारी के बाद नोएडा पुलिस ने भी राहत की सांस ली है।
फरीदाबाद में आखिरी बार देखा गया था विकास दुबे को
विकास दुबे को आखिरी बार फरीदाबाद में देखा गया था, जिसके कुछ सीसीटीवी फुटेज सामने आए थे और पुलिस के सूत्रों ने भी उसके पैदल दिल्ली में एंट्री करने की पुष्ठी की थी। कानपुर में शूटआउट कांड करने के बाद उसकी लोकेशन औरेया भी देखी गई थी। यूपी पुलिस और एसटीएफ कानपुर से लेकर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों और दूसरे राज्यों में विकास दुबे की तलाश में जुटी थी। इस दौरान कई जगह छापेमारी भी हुई है।
फरीदाबाद के होटल में पुलिस ने मारा था छापा
इतना ही नहीं, जब पुलिस को विकास दुबे फरीदाबाद के सीसीटीवी में दिखा तो वो दबिश के लिए वहां के एक होटल में पहुंचे। पुलिस ने होटल से सीसीटीव फुटेज भी बरामद किए। बावजूद इन सबके पुलिस को विकास दुबे हाथ नहीं लगा और वो वहां से भी भाग निकला था।
उज्जैन में गिरफ्तारी
पुलिस विकास दुबे की तलाश कई राज्यों में कर रही थी। आखिरकार पुलिस को सफलता मध्य प्रदेश में हाथ लगी। पुलिस ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से विकास दुबे को गिरफ्तार किया। हरियाणा के फरीदाबाद से विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि फरीदाबाद से मध्य प्रदेश तक वो आसानी से एक गाड़ी में पहुंचा, जो पूरी तरह सेफ थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बंदिशों के बाद भी विकास दुबे आखिर कैसे इतना लंबा सफर कर पाया?
अब तक क्या हुआ?
2 जुलाई: विकास दुबे को गिरफ्तार करने 3 थानों की पुलिस ने बिकरू गांव में दबिश दी, विकास की गैंग ने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी।
3 जुलाई: पुलिस ने सुबह 7 बजे विकास के मामा प्रेम प्रकाश पांडे और सहयोगी अतुल दुबे का एनकाउंटर कर दिया। 20-22 नामजद समेत 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। विकास पर 2.5 लाख, अमर पर 25 हजार और दूसरे लोगों पर 18-18 हजार रुपए के इनाम ऐलान किया गया था। हालांकि, विकास का इनाम बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया था।
5 जुलाई: पुलिस ने विकास के नौकर और खास सहयोगी दयाशंकर उर्फ कल्लू अग्निहोत्री को घेर लिया। पुलिस की गोली लगने से दयाशंकर जख्मी हो गया था। उसने खुलासा किया कि विकास ने पहले से प्लानिंग कर पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
6 जुलाई: पुलिस ने अमर की मां क्षमा दुबे और दयाशंकर की पत्नी रेखा समेत 3 को गिरफ्तार किया। शूटआउट की घटना के वक्त पुलिस ने बदमाशों से बचने के लिए क्षमा दुबे का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन क्षमा ने मदद करने की बजाय बदमाशों को पुलिस की लोकेशन बता दी। रेखा भी बदमाशों की मदद कर रही थीं।
8 जुलाई: एसटीएफ ने विकास के करीबी अमर दुबे को मार गिराया।
8 जुलाई: चौबेपुर थाने के एसओ रहे विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा को गिरफ्तार किया गया।
9 जुलाई: एसटीएफ ने कानपुर में प्रभात उर्फ कार्तिकेय को ढेर किया। दो फरीदाबाद से पकड़ा गया था। पुलिस उसे रिमांड पर ला रही थी। लेकिन वह मौका पाकर भागने लगा और पुलिस की कार्रवाई में मारा गया।
9 जुलाई: इटावा के बकेवर में रणवीर उर्फ बउअन मारा गया। वह कार लूटकर भाग रहा था।
9 जुलाई: उज्जैन के महाकाल मंदिर से विकास दुबे गिरफ्तार।
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