
द्रास (Report-Anish Kumar)। 26 जुलाई को 25वां कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas 2024) मनाया गया। इस अवसर पर 1999 में लड़ी गई इस लड़ाई में शामिल कर्नल दीपक रामपाल (वीर चक्र) ने एशियानेट न्यूज के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की।
दीपक रामपाल 1999 की लड़ाई के समय 17 जाट के कंपनी कमांडर थे। उन्होंने कहा, "मैं टाइगर हिल के बगल में स्थित पहाड़ी पर लड़ रहा था। इसे प्वाइंट 4875 कहा जाता है। हमने 4 से 8 जुलाई तक लड़ाई लड़ी। चार दिन तक लंबी और गंभीर जंग हुई। हमने दुश्मन पर हमला किया तो उसने भी पलटवार किया।"
जवानों ने तय कर लिया था तिरंगा लहराकर लौटना है या इसमें लिपटकर
दीपक रामपाल ने कहा, "दुश्मन प्वाइंट 4875 पर फिर से कब्जा करना चाहता था। हमारे जवानों का जोश बहुत ऊंचा था। हम कहते थे कि दिए गए टारगेट पर तिरंगा झंडा लहराने के बाद ही लौटेंगे या फिर तिरंगे में लिपटकर वापस जाएंगे। जीत पाए बिना हमारे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं था। हमपर भारी बमबारी और गोलीबारी हुई। हमारे बहुत से जवान शहीद हुए, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी। राष्ट्र प्रथम और भारत माता की जय की भावना से हम लड़ते रहे। 25 साल बाद मैं आज बहुत खुश हूं।"
क्यों मनाया जाता है कारगिल विजय दिवस?
बता दें कि कारगिल विजय दिवस 1999 में जम्मू कश्मीर के कारगिल में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में जीत की खुशी में मनाया जाता है। कारगिल विजय दिवस का इतिहास 1971 की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध से जुड़ा है। इस जंग के चलते पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना था।
1971 की लड़ाई के बाद भी दोनों देशों के बीच टकराव जारी रहा। इसमें सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा करने के लिए आस-पास की पर्वत श्रृंखलाओं पर सैन्य चौकियां तैनात करना भी शामिल था। कारगिल में पहाड़ी की चोटियों पर सर्दी के मौसम में भारत के सैनिक तैनात नहीं रहते थे। इसी तरह दूसरी ओर पाकिस्तान के सैनिक भी इन दिनों चोटियों पर नहीं होते थे।
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इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने घुसपैठ की और कारगिल की पहाड़ी की चोटियों पर कब्जा कर लिया। उनका मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क तोड़ना था। 2 मई को इस घुसपैठ की जानकारी भारतीय सेना को मिली। इसके बाद दुश्मनों को हटाने के लिए ऑपरेशन विजय चलाया गया। 26 जुलाई तक लड़ाई चली। भारतीय सेना ने घुसपैठियों का सफाया कर कारगिल पर फिर से अपना नियंत्रण स्थापित किया।
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