पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 27 लोगों की जान गई, जबकि 20 से ज्यादा घायल हैं। आतंकियों ने 22 अप्रैल की दोपहर 3 बजे सैलानियों से उनका धर्म पूछकर गोलियां मारीं। फरवरी, 2019 में हुए पुलवामा अटैक के बाद येअब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है।
पहलगाम में हुआ आतंकी हमला ऐसे वक्त में हुआ है, जब घाटी में हालात काफी हद तक नॉर्मल हो चुके थे। कश्मीर में पर्यटन उद्योग फलने-फूलने लगा था।
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कश्मीर वादियों में फिर पसरने वाला है सन्नाटा
कश्मीर घाटी में सैलानियों की संख्या बढ़ रही थी। वहां के तमाम होटल, लॉज और टूरिज्म स्पॉट पर रौनक दिखने लगी थी। हालांकि, इस आतंकी हमले के बाद अब कश्मीर की वादियों में एक बार फिर सन्नाटा पसरने वाला है।
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2021 से कश्मीर घाटी में लगातार बढ़ रहे थे टूरिस्ट
जम्मू-कश्मीर टूरिज्म डिपार्टमेंट के मुताबिक, 2021 में वहां कुल 1.13 करोड़ टूरिस्ट पहुंचे थे। वहीं, 2022 में आंकड़ा बढ़कर 1.88 करोड़ पहुंच गया। इसके बाद 2023 में ये 2.11 करोड़ तक पहुंच गया।
2024 में तो जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्डतोड़ 2.36 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जिसमें 27 लाख टूरिस्ट सिर्फ कश्मीर घूमने पहुंचे। लेकिन पहलगाम के आतंकी हमले से कश्मीरियों को तगड़ा घाटा होनेवाला है।
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कश्मीर में लाखों परिवार सिर्फ टूरिज्म पर डिपेंड
कश्मीर घाटी में लाखों परिवार सिर्फ टूरिज्म से होनेवाली कमाई पर ही निर्भर हैं। चाहे वो शिकारा चलाने वाले हों, होटल, रेस्टोरेंट, घोड़ेवाले, हैंडीक्राफ्ट से बने सामान बेचने वाले। लेकिन अब सैलानियों की संख्या घटने से इनके काम-धंधों पर सीधा असर पड़ेगा।
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सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए रखा था बड़ा लक्ष्य
सरकार ने तय किया था कि 2025 तक जम्मू-कश्मीर को भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाएंगे। इसके लिए हर साल 2000 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट का टारगेट रखा गया था।
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पहलगाम में हुए आतंकी हमले से टूट जाएगी टूरिज्म की रीढ़ृ
कश्मीर में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वहां एडवेंचर टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, सैफरन टूरिज्म, हेरिटेज और कल्चरल टूरिज्म को भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा था। लेकिन कश्मीर में हुए इस आतंकी हमले के बाद इन सब पर इसका असर देखने को मिलेगा।
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जम्मू-कश्मीर के कई जिलों पर दिखेगा असर
घाटी में टूरिज्म घटने के साथ ही फल व्यापार पर भी बड़ा असर पड़ेगा। इससे कुपवाड़ा, बांदीपोरा, बारामुला और बडगाम जैसे जिलों के हजारों किसान और मजदूर की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।
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