
नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LOP) मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) पर निशाना साधा। उन्होंने सिब्बल पर जानबूझकर कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि सिब्बल एक अच्छे वकील हो सकते हैं, लेकिन वह एक जन नेता नहीं हैं। उन्हें राजनीति की जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं है। खड़गे ने कहा- जब तक सिब्बल केंद्र में मंत्री थे, तब तक तकलीफ नहीं थी। आज उन्हें नेतृत्व से तकलीफ हो रही है। कांग्रेस के जी-23 समूह में कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद सहित कई शामिल हैं, जो 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद से पिछले दो वर्षों से पार्टी नेतृत्व में संगठन के पुनर्गठन की मांग उठा रहे हैं।
पार्टी के लिए कभी किसी गांव तक नहीं गए सिब्बल
सिब्बल पर हमला बोलते हुए खड़गे ने कहा- वह कभी किसी गांव, जिले या राज्य में नहीं गए और कांग्रेस पार्टी के लिए काम नहीं किया। इसलिए उन्हें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की इच्छा की जानकारी नहीं है। उन्हें पार्टी के बारे में कुछ पता ही नहीं है। सिब्बल जानबूझकर पार्टी को कमजोर कर रहे हैं, यह कहते हुए उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, जो पार्टी की बेहतरी के लिए काम नहीं कर रहे हैं।
सीडब्ल्यूसी को आवश्यक कार्रवाई कार अधिकार
खड़गे ने कहा कि पांच राज्यों में चुनावी हार के कारण सोनिया गांधी ने स्थानीय इकाइयों के पुनर्गठन के लिए सभी राज्य पार्टी प्रमुखों से इस्तीफा मांगा है। सिब्बल अनावश्यक विवाद की पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी ने उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार दिया है, जो पार्टी के पदों पर हैं और पार्टी को मजबूत करने के लिए काम नहीं कर रहे हैं।
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खड़गे की नाराजगी क्यों
पांच राज्यों में हार के बाद कपिल सिब्बल ने कहा था कि, अब वक्त आ गया है कि 'घर की कांग्रेस' की जगह 'सब की कांग्रेस' हो। इस बार के परिणामों ने मुझे आश्चर्यचकित नहीं किया, क्योंकि मुझे इसका अंदाजा पहले से था। हम 2014 से लगातार नीचे की ओर जा रहे हैं। हमने राज्य दर राज्य खोया है। जहां हम सफल हुए वहां भी हम अपने कार्यकर्ता को एक साथ नहीं रख पाए। इस बीच कांग्रेस से कुछ प्रमुख लोगों का पलायन हुआ है। जिनमें नेतृत्व का भरोसा था वह कांग्रेस से दूर जा रहे थे। वाकई दिलचस्प है कि 2014 से अब तक लगभग 177 सांसद, विधायक के साथ-साथ 222 उम्मीदवार कांग्रेस छोड़ चुके हैं। हमने इतिहास में किसी अन्य राजनीतिक दल में इस तरह का पलायन नहीं देखा है।
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