
नई दिल्ली। पंजाब में चुनाव (Punjab Election 2022) से पहले चर्चित कवि और पूर्व आप नेता कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) और आप प्रमुख व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इसी क्रम में शुक्रवार को कुमार विश्वास ने कहा कि 2017 में हुए पंजाब विधानसभा के चुनाव के दौरान खालिस्तान समर्थक अरविंद केजरीवाल के घर आते थे। वे लोग बैठकें करते थे। मैंने उन्हें रंगे हाथ पकड़ा था।
अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना कुमार विश्वास ने कहा कि वह दो बातों में माहिर हैं। पहला बड़े आत्मविश्वास के साथ सफेद झूठ बोलना और दूसरा एक खास सूरत बनाकर यह सिद्ध करना कि पूरी दुनिया उनके पीछे पड़ी हुई है। एक बार भी उनको किसी ने आतंकवादी नहीं कहा, पर वह देश को यह बताएं कि क्या पिछले चुनाव में उनके घर पर आतंकी संगठन से सिम्पैथी रखने वाले लोग, बात कराने वाले लोग, आते थे या नहीं।
कुमार विश्वास ने कहा कि जब मैंने इसपर आपत्ति उठाई थी तो पंजाब की मीटिंग से मुझे बाहर कर दिया गया था। मैं उनके घर पर एक दिन मीटिंग रंगे हाथ पकड़ी थी। बाहर एक गार्ड खड़ा था। उसने कहा था कि आप अंदर नहीं जा सकते, मीटिंग चल रही है। मैंने उसे धक्का दिया और अंदर जाकर देखा तो वही लोग बैठे थे। मैंने कहा था कि किनके साथ मिलना है। इस पर उन्होंने कहा था कि नहीं...नहीं...कुछ नहीं...कुछ नहीं...। इसका बड़ा फायदा होगा।
बहस क्यों नहीं कर लेते
कुमार विश्वास ने कहा कि वह (अरविंद केजरीवाल) किसी प्लेटफॉर्म पर आकर बहस क्यों नहीं करते? मुझे वह कह रहे हैं कवि है, हास्य कवि है। भाई मैं तो पढ़ा लिखा हूं। गोल्ड मेडलिस्ट हूं। कॉलेज में 17 साल पढ़ाया है। आप तो ऐसे हास्य कलाकार को लेकर घूम रहे हैं, जिसने 10वीं-12वीं भी तीन बार में पास किया है। कल होकर कोई गड़बड़ कर देगा तो कह दीजिएगा कि वह तो हास्य कलाकार है, मैं क्या करूं।
विश्वास ने कहा कि केजरीवाल कह रहे हैं कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी एक सुर में बोल रहे हैं। राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी चुनाव में एक-दूसरे पर भीषण वार-प्रहार करते हैं, लेकिन उन दोनों में कम से कम यह तमीज तो है कि राष्ट्रीय अखंडता के मामले में एक हो जाएं। राहुल गांधी अपने पिता और अपनी दादी को इसी राष्ट्रीय अखंडता के मुद्दे पर खो चुके हैं। मैं उन्हें (अरविंद केजरीवाल) को चुनौती देता हूं। वह खालिस्तान के विरोध में बयान देकर बताएं। वे इधर-उधर की बात नहीं करें। यह बताएं कि खालिस्तान के विरोध में उनका क्या बयान है। यह बताएं कि उनके घर पर लोग आते थे या नहीं। बता दें, नहीं तो मैं बता दूंगा।
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